भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार बनाया है, उसकी जीत के लिए भाजपा हाईकमान ने पूरी तैयारी कर ली है। कांग्रेस के लगभग 17 विधायकों से बात हो गई है जबकि भाजपा को 10 की ही जरुरत है।
भाजपा हाईकमान की पसंद के कारण ही केवट उम्मीदवार बने। मध्यप्रदेश के नेताओं को तो उनके नाम की भनक भी नहीं थी। हाईकमान की इतनी मजबूत तैयारी है कि मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्ट 2 जैसा बड़ा हंगामा हो सकता है। कांग्रेस के विधायक खुलकर भाजपा का सपोर्ट कर सकते है।
बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि जिस तरह से आम मतदाता वोट देता है उसी तरह विधायक भी राज्यसभा उम्मीदवार को वोट देते है। कुछ समय पहले तक इस मामले में दल बदलू की कार्रवाई हो सकती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है इसलिए विधायक अपने मन से किसी भी राजयसभा उम्मीदवार को वोट दे सकता है।
अब पहले की तरह विधायक को वोट किसको दिया यह दिखाना का भी सिस्टम नहीं बचा है इस वजह से कांग्रेस के विधायक भले ही दिखावे के लिए कांग्रेस के साथ रहे लेकिन जब वोट डालने की बात आएगी तब कांग्रेसी विधायक भाजपा उम्मीदवार को वोट दे देंगे।
ऐसा हो सकता है की कांग्रेस विधायकों को ऐसा आदेश दे दे की वोट किसको दिया उसकी फोटो मोबाइल में खींच कर लाए लेकिन शायद चुनाव आयोग अब ऐसा नहीं करने देगा। भाजपा हाईकमान ने लगभग 17 कांग्रेसी विधायकों से बात कर ली है। प्रदेश भाजपा को सिर्फ व्यवस्ता के सूत्र हाथ में दिए है बाकी कांग्रेस विधायकों के लिए वोटिंग के बदले में क्या करना है यह सब हाईकमान ने तय कर रखा है।
अफसरों के जरिए भाजपा हाईकमान पता कर लेगी किस कांग्रेस विधायक ने भाजपा को वोट दिया है। इस बात की पूरी संभावनाएं है की सिंधिया गुट जैसा कांग्रेस का एक गुट भाजपा में शामिल हो सकता है। यह बात भी सही है की राजनीती में कब क्या हो सकता है किसी को नहीं पता…











