देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुका इंदौर इन दिनों आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से जूझ रहा है। शहर की सड़कों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे आवारा कुत्तों के झुंड अब लोगों के लिए भय का कारण बनते जा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि हर दिन औसतन 200 से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जून महीने के शुरुआती पांच दिनों में ही 961 लोगों को एंटी रेबीज उपचार की जरूरत पड़ी। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब नगर निगम हर साल कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करता है।
सांवेर रोड की घटना ने बढ़ाई दहशत
सांवेर रोड स्थित अरविंदो अस्पताल क्षेत्र में हाल ही में सामने आई घटना ने इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। यहां एक ही आवारा कुत्ते ने 24 घंटे के भीतर 42 लोगों को काटकर घायल कर दिया। पीड़ितों में नर्स, मेडिकल छात्र, मरीज, सिक्योरिटी गार्ड और राहगीर शामिल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बन गया।
हमले के बाद भी संबंधित आवारा कुत्ते को पकड़ने में प्रशासन को सफलता नहीं मिल सकी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय पर नगर निगम की रेस्क्यू टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिसके कारण हालात और बिगड़ गए। ग्रामीण और आसपास के लोग अपनी सुरक्षा के लिए लाठियां लेकर सड़कों पर उतर आए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी संख्या में लोग घायल नहीं होते।
पांच दिन में 961 मामले
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि इंदौर में हर महीने औसतन 6 हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं। जून के शुरुआती पांच दिनों में ही 961 मामले सामने आना इस बात का संकेत है कि समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
नगर निगम हर साल आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और पुनर्वास पर बड़ी राशि खर्च करता है, लेकिन इसके बावजूद घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नसबंदी कार्यक्रम काफी नहीं है। कचरा प्रबंधन, खुले में भोजन के स्रोतों की उपलब्धता और पशु आबादी की निगरानी जैसे पहलुओं पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहले भी डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जता चुका है। देश के कई शहरों में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर दायर याचिकाओं के चलते यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय निकायों, पशु कल्याण संस्थाओं और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय के बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
नागरिकों में बढ़ रहा डर
शहर के कई इलाकों में लोगों का कहना है कि सुबह की सैर, बच्चों का स्कूल जाना और रात में बाहर निकलना पहले की तुलना में ज्यादा जोखिमपूर्ण हो गया है। कई कॉलोनियों के रहवासियों ने नगर निगम से विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों की समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।











