मध्यप्रदेश में राजयसभा की तीसरी सीट पर सीएम मोहन यादव का बड़ा बयान, बोले – तीसरी सीट आएगी नहीं तो जाएगी कहां

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By Raj RathorePublished On: June 6, 2026
CM Mohan Yadav

मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा ने अपने दो उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कर दिए हैं, लेकिन तीसरी सीट को लेकर जारी चर्चाओं ने सियासी माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है। इसी बीच इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

दरअसल LAC व्यापार एवं निवेश फोरम में शामिल होने इंदौर आए सीएम मोहन यादव से जब पत्रकारों ने राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “तीसरी सीट आएगी नहीं तो जाएगी कहां?” मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी भले ही हल्के अंदाज में की गई हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं।

आत्मविश्वास का संकेत

राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक रणनीतियों के बीच आया यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भाजपा लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके पास पर्याप्त समर्थन और मजबूत संगठनात्मक ताकत मौजूद है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी अपने विधायकों और सहयोगी समर्थन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है।

कांग्रेस ने बताया अतिआत्मविश्वास

मुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि केवल बयान देने से चुनाव नहीं जीते जाते। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अंतिम फैसला मतदान के बाद ही सामने आता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ चुनाव लड़ रही है। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने भी दावा किया कि पार्टी के भीतर किसी प्रकार का भ्रम नहीं है और परिणाम आने के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी।

कैलाश विजयवर्गीय भी दे चुके हैं संकेत

मुख्यमंत्री मोहन यादव से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी तीसरी सीट को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि यदि भाजपा तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारती है तो उसे जिताने की पूरी कोशिश की जाएगी।

प्रतिष्ठा की लड़ाई

राज्यसभा चुनाव में कई बार केवल संख्या बल ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति और प्रबंधन भी अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि तीसरी सीट अब सिर्फ संसदीय प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं रह गई है, बल्कि इसे राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

भाजपा जहां संगठन और समर्थन के आधार पर जीत का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस एकजुटता और रणनीतिक प्रबंधन को अपनी ताकत बता रही है। ऐसे में राज्यसभा की तीसरी सीट पर मुकाबला और दिलचस्प होता नजर आ रहा है।