इंदौर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब खुलकर सड़कों तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा शहर के पानी को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने सार्वजनिक तौर पर जवाब दिया है। सोमवार को मेयर सुदामा नगर क्षेत्र पहुंचे और स्थानीय रहवासियों के घरों में जाकर नल का पानी पीते हुए दावा किया कि इंदौर का पानी पूरी तरह सुरक्षित और पीने योग्य है।
दरअसल, कुछ दिन पहले जीतू पटवारी ने दावा किया था कि इंदौर में सप्लाई होने वाला लगभग 90 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया था कि शहर के कई इलाकों में दूषित पानी पहुंच रहा है और सुदामा नगर क्षेत्र का पानी भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
मेयर ने किया निरीक्षण
कांग्रेस के इन आरोपों के बाद मेयर पुष्यमित्र भार्गव सीधे सुदामा नगर पहुंचे। उन्होंने उन स्थानों का निरीक्षण किया, जिनका जिक्र कथित रिपोर्ट में किया गया था। इस दौरान स्थानीय लोगों की मौजूदगी में मेयर ने घरों के नलों से पानी पीकर कांग्रेस के दावों को खारिज किया।
मेयर ने कहा कि जिस क्षेत्र के पानी को जहरीला बताया जा रहा है, उसी क्षेत्र का पानी उन्होंने खुद सार्वजनिक रूप से पिया है। यहां के लोग लंबे समय से इसी पानी का उपयोग कर रहे हैं और किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की शिकायत सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट भ्रामक और अधूरी
पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस पर इंदौर की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जीतू पटवारी ने 240 पानी के नमूनों की जांच का दावा किया था, लेकिन सार्वजनिक तौर पर केवल 130 लोगों की सूची जारी की गई। उन्होंने बाकी सैंपलों और संबंधित स्थानों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
मेयर ने कहा कि नगर निगम हर शिकायत की जांच के लिए तैयार है, लेकिन चुनिंदा मामलों के आधार पर पूरे शहर की जल व्यवस्था पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है।
इंदौर की छवि खराब करने की कोशिश
सुदामा नगर के रहवासियों ने भी क्षेत्र में जलापूर्ति को संतोषजनक बताया। लोगों का कहना है कि नर्मदा परियोजना से कनेक्शन मिलने के बाद उन्हें साफ पानी मिल रहा है और उन्होंने इस संबंध में किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
मेयर ने आगे कहा कि इंदौर देशभर में स्वच्छता और बेहतर नागरिक सुविधाओं के लिए जाना जाता है। ऐसे में बिना पूरे तथ्यों के शहर की जल व्यवस्था को लेकर भ्रम फैलाना शहर की छवि को नुकसान पहुंचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि अगर रिपोर्ट इतनी गंभीर थी तो उसे तत्काल सार्वजनिक किया जाना चाहिए था, ताकि जिम्मेदार एजेंसियां कार्रवाई कर पातीं।











