मध्यप्रदेश में अब घर बैठे मिलेगा न्याय, हाई कोर्ट की नई टेक्नोलॉजी से बदलेगा पूरा सिस्टम

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By Raj RathorePublished On: May 16, 2026
MP High Court News

मध्यप्रदेश की न्यायिक व्यवस्था अब तेजी से डिजिटल युग में प्रवेश कर रही है। न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और आम नागरिकों के लिए सरल बनाने की दिशा में हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। भोपाल में आयोजित ‘फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया-यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कई वरिष्ठ न्यायाधीशों की मौजूदगी में न्यायपालिका से जुड़े कई अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए।

इस पहल के तहत कोर्ट ऑर्डर की डिजिटल कॉपी, लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग सिस्टम, AI आधारित डेटा मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम और मूक-बधिर नागरिकों के लिए विशेष मोबाइल एप जैसी सुविधाएं शुरू की गईं। इसे देश की न्यायिक व्यवस्था को टेक्नोलॉजी से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

तकनीक से आसान होगी न्याय प्रक्रिया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की न्याय परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था से जुड़ी रही है। आधुनिक दौर में तकनीक न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी और जनसुलभ बनाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने डिजिटल नवाचारों के जरिए आम नागरिकों को राहत देने का काम किया है। मूक-बधिर लोगों के लिए तैयार ‘संकेत वाणी’ एप, ई-फाइलिंग और डिजिटल सर्टिफिकेशन जैसी सुविधाएं न्याय प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लाएंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्थाओं में भी साइबर तहसील और ई-फाइल कैबिनेट जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं को तेजी से लागू कर रही है।

‘24×7 सिस्टम’ की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि अदालतों को अब अस्पतालों की तरह 24×7 सिस्टम के रूप में विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जैसे अस्पताल में मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक स्क्रीन पर उपलब्ध होती है, उसी तरह न्यायिक व्यवस्था में कोर्ट, पुलिस, जेल, फॉरेंसिक और मेडिको-लीगल सिस्टम को एकीकृत किया जाना चाहिए।

CJI ने कहा कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट का यह डिजिटल मॉडल देशभर की अदालतों के लिए उदाहरण बन सकता है। इससे नागरिकों को अर्जेंट मामलों में त्वरित राहत देने में मदद मिलेगी और न्याय प्रक्रिया की गति बढ़ेगी।

हाईकोर्ट ने लॉन्च किए कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने CLASS यानी Courtroom Live Audio-Visual Streaming System लॉन्च किया। यह एक ओटीटी स्टाइल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए हाई कोर्ट अपनी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग नियंत्रित करेगा। इसके अलावा नया डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जहां जज, वकील और आम नागरिक कोर्ट ऑर्डर, बेल एप्लिकेशन और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन देख सकेंगे।

‘प्रथम’ नाम का AI आधारित डेटा मैनेजमेंट सिस्टम भी शुरू किया गया, जो न्यायिक डेटा को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।

मूक-बधिर नागरिकों के लिए ‘संकेत वाणी’ एप

कार्यक्रम की सबसे खास पहल मूक एवं श्रवण बाधित नागरिकों के लिए तैयार किया गया ‘संकेत वाणी’ मोबाइल एप रहा। इस एप के जरिए ऐसे लोग न्याय प्रक्रिया में आसानी से संवाद कर सकेंगे और उन्हें कानूनी जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही Copying Automation and Judicial Information Dissemination System की भी शुरुआत की गई, जिससे कोर्ट के फैसलों और आदेशों की प्रमाणित कॉपी अब ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी।

केंद्रीय मंत्री मेघवाल बोले- MP देश के लिए मॉडल

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश ‘Ease of Justice’ और ‘Ease of Living’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि CCTNS, डिजिटल कोर्ट सिस्टम और मूक-बधिरों के लिए तैयार एप जैसी पहलें देश के लिए मॉडल बन सकती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ट्रांसफॉर्म, रिफॉर्म और परफॉर्म की दिशा में आगे बढ़ रहा है और तकनीकी एकीकरण से लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।

‘वन केस, वन डाटा’ की दिशा में बड़ा कदम

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि अब फरियादियों को कोर्ट ऑर्डर की कॉपी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए रियल टाइम में जानकारी साझा की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि अब CCTNS के क्राइम नंबर, कोर्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम के CNR नंबर और ई-प्रिजन के Prisoner ID को एक साथ लिंक करना आसान होगा। इससे जमानत, सुनवाई और बंदियों की रिहाई जैसे मामलों में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।