मध्यप्रदेश में होगा मंत्रिमंडल विस्तार, सीएम मोहन यादव ने अमित शाह से की मुलाकात

Author Picture
By Raj RathorePublished On: May 14, 2026
Mohan Yadav with Amit Shah

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरे और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में इसे जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हैं और राज्य सरकार के कामकाज को लेकर फीडबैक भी ले रहे हैं। इससे पहले दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बड़े बदलाव की रणनीति तैयार की जा रही है।

6-7 नए मंत्री बनेंगे

राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार मई-जून के बीच मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। इसमें कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि 6 से 7 नए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन या राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। ऐसे में उनके स्थान पर नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना बढ़ गई है। हाल ही में वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय की अमित शाह से मुलाकात को भी इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।

अभी 4 पद खाली

वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जबकि अभी चार पद खाली हैं। हालांकि राजनीतिक हलकों में चर्चा केवल रिक्त पदों को भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।

भाजपा ने 2023 विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन सरकार गठन के समय कई वरिष्ठ नेताओं और अनुभवी विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी थी। ऐसे में अब अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए विस्तार की संभावना मानी जा रही है।

चुनावों पर भाजपा की नजर

भाजपा आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में बुंदेलखंड, विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के नेताओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

इसके अलावा ओबीसी, आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं को भी प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है। पार्टी आगामी चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए सरकार और संगठन दोनों स्तर पर संतुलन बनाने की तैयारी में जुटी दिखाई दे रही है।