मध्यप्रदेश का चीनी का कटोरा है यह जिला, दुनियाभर में खाया जाता है यहां का गुड़

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By Raj RathorePublished On: May 7, 2026
Sugar Bowl of MP

Sugar Bowl of MP : नरसिंहपुर जिला आज सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी खास पहचान बना चुका है। उपजाऊ काली मिट्टी, नर्मदा घाटी का अनुकूल वातावरण और किसानों की मेहनत ने इस जिले को “मध्यप्रदेश का शुगर बाउल” बना दिया है। गन्ने की रिकॉर्ड पैदावार और बेहतरीन गुणवत्ता वाले गुड़ के कारण नरसिंहपुर का नाम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है।

प्रदेश में जितना गन्ना उत्पादन होता है, उसका लगभग 65 से 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले नरसिंहपुर जिले से आता है। यही वजह है कि यह जिला गन्ना उत्पादन में लगातार मध्यप्रदेश में पहले स्थान पर बना हुआ है। जिले के खेतों में दूर-दूर तक फैली गन्ने की हरियाली यहां की मजबूत कृषि अर्थव्यवस्था की पहचान बन चुकी है।

करेली का गुड़ बना खास पहचान

नरसिंहपुर का करेली क्षेत्र अपने गुड़ के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां तैयार होने वाला गुड़ अपनी शुद्धता, स्वाद और औषधीय गुणों के कारण अलग पहचान रखता है। यही कारण है कि भारत सरकार ने करेली के गुड़ को “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” योजना में शामिल किया है।

करेली मंडी से हर साल बड़ी मात्रा में गुड़ महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान सहित कई राज्यों और विदेशों तक भेजा जाता है। व्यापारियों के मुताबिक यहां के गुड़ की मांग लगातार बढ़ रही है।

हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार

नरसिंहपुर में गुड़ उत्पादन अब एक बड़े उद्योग का रूप ले चुका है। जिले में करीब 3 हजार से अधिक गुड़ निर्माण इकाइयां और स्वचालित खांडसारी संयंत्र संचालित हो रहे हैं। यहां पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

इन इकाइयों से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी गन्ना और गुड़ उद्योग की बड़ी भूमिका मानी जाती है।

आधुनिक खेती से बढ़ा उत्पादन

जिले के किसान अब गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां CO 0238, CO 86032 और CO 92005 जैसी उन्नत किस्मों की खेती की जाती है। इन किस्मों में रस की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे गुड़ और चीनी उत्पादन बेहतर होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार नरसिंहपुर की नर्मदा घाटी की मिट्टी और जलवायु गन्ने की खेती के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। यही वजह है कि यहां उत्पादित गन्ने की गुणवत्ता अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर मानी जाती है।

जिले में स्थापित हैं बड़ी चीनी मिलें

गन्ने की भारी पैदावार को देखते हुए जिले में कई बड़ी चीनी मिलें भी स्थापित की गई हैं। इन मिलों की क्षमता 2500 से 3000 टन प्रतिदिन तक बताई जाती है। ये मिलें किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं।

गुड़ और गन्ने की बढ़ती मांग ने नरसिंहपुर को कृषि और व्यापार दोनों क्षेत्रों में नई पहचान दिलाई है। आज यह जिला सिर्फ मध्यप्रदेश का “Sugar Bowl” ही नहीं, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण समृद्धि और कृषि क्षमता का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।