जबलपुर क्रूज हादसे में हुए बड़े खुलासे, 8वीं पास हेल्पर को बनाया पायलट, एक इंजन बंद होने के बाद भी पानी में उतार दिया था क्रूज

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By Raj RathorePublished On: May 6, 2026
Jabalpur Cruise Tragedy

Jabalpur Cruise Tragedy : जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुआ दर्दनाक क्रूज हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही का मामला बनता जा रहा है। इस हादसे में 13 पर्यटकों की मौत हुई थी, लेकिन अब सामने आ रही जानकारियां कई बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि हादसे के पीछे व्यवस्थागत चूक, तकनीकी खामियां और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी कई वजहें थीं।

हादसे के वक्त क्रूज चला रहे महेश पटेल को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार महेश पहले हेल्पर के तौर पर काम करते थे। बाद में उन्होंने धीरे-धीरे क्रूज संचालन सीखा और फिर नियमित रूप से इसे चलाने लगे। अधिकारियों की ओर से उन्हें लाइसेंस और आवश्यक प्रमाण पत्र भी दिलाए गए थे।

हालांकि, पर्यटन विकास निगम के एडवाइजर कमांडर राजेंद्र निगम का कहना है कि महेश को पूरी तरह प्रशिक्षित किया गया था और उन्हें संचालन के लिए सक्षम माना गया था। इसके बावजूद यह सवाल उठ रहा है कि जब प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों—जैसे भोपाल और हनुमंतिया—में नेवी के रिटायर्ड और अनुभवी अधिकारियों को नियुक्त किया जाता है, तो बरगी डैम जैसे संवेदनशील स्थल पर ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

एक इंजन बंद था

हादसे की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि दुर्घटना के समय क्रूज का एक इंजन बंद था। यानी तकनीकी रूप से क्रूज पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में नहीं था। इसके बावजूद पर्यटकों को लेकर उसे डैम में उतार दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब मौसम और तेज हवाओं के बीच एक इंजन बंद होने की स्थिति में क्रूज संचालन बेहद जोखिम भरा था।

पूर्व अधिकारियों का कहना है कि यदि उस समय कोई अत्यधिक अनुभवी पायलट मौजूद होता, तो हालात को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। उनका मानना है कि मौसम खराब होने पर क्रूज को पानी में उतारना ही नहीं चाहिए था और यदि उतारा गया था, तो खतरे को देखते हुए तुरंत उसे किनारे लाने की कोशिश होनी चाहिए थी।

कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है। जेएमएफसी डीपी सूत्रकार ने बरगी थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि चालक समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दो दिनों के भीतर FIR दर्ज कर न्यायालय को जानकारी दी जाए।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि क्रूज का संचालन लापरवाहीपूर्वक किया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ और कई लोगों की जान चली गई। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि चालक क्रूज की स्थिति से परिचित होने के बावजूद यात्रियों को डूबता छोड़कर स्वयं सुरक्षित बाहर निकल गया और यात्रियों को बचाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए।

गैर-इरादतन हत्या का मामला

न्यायालय ने इस पूरे मामले को भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 106 और 110 के तहत आपराधिक मानव वध यानी गैर-इरादतन हत्या का मामला माना है। कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में भी इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।

पूरे सिस्टम पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद केवल चालक ही नहीं, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटन संचालन प्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। आखिर खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद क्रूज संचालन की अनुमति क्यों दी गई? तकनीकी खराबी होने के बावजूद पर्यटकों की जान जोखिम में क्यों डाली गई? और क्या सुरक्षा मानकों का पालन वास्तव में किया जा रहा था?