Mohan Yadav in Bengal Elections 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 294 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे भाजपा की आक्रामक रणनीति और दूसरे राज्यों के नेताओं की सक्रिय भागीदारी को भी बड़ा कारण माना जा रहा है।
सीएम मोहन यादव ने भी पश्चिम बंगाल चुनाव में कई चरणों में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में जमकर प्रचार किया। खास बात यह रही कि जिन सीटों पर उन्होंने प्रचार किया, वहां भाजपा को बड़ी सफलता मिली। इसके चलते अब बंगाल चुनाव में सीएम मोहन यादव के “स्ट्राइक रेट” की भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है।
7 में से 6 सीटों पर BJP की जीत
सीएम मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल की 7 विधानसभा सीटों – सलतोरा, छातना, बांकुरा, बरजोरा, ओंदा, मेदिनीपुर और कमरहाटी में भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया था। इनमें से 6 सीटों पर भाजपा ने शानदार जीत हासिल की है। केवल कमरहाटी सीट पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
इस हिसाब से देखा जाए तो बंगाल चुनाव में सीएम मोहन यादव का स्ट्राइक रेट करीब 86 प्रतिशत रहा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह आंकड़ा भाजपा के लिए काफी अहम माना जा रहा है। खास बात यह भी रही कि जिन सीटों पर भाजपा जीती, वहां उम्मीदवारों ने 30 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि प्रचार अभियान ने जमीनी स्तर पर असर छोड़ा।
रोड शो, जनसभाएं और नामांकन में भी रहे सक्रिय
सीएम मोहन यादव ने 2 अप्रैल से पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी। उन्होंने कई संयुक्त जनसभाओं को संबोधित किया, उम्मीदवारों के नामांकन में शामिल हुए और कई सीटों पर रोड शो भी किए। प्रचार के दौरान उन्होंने भाजपा सरकार की योजनाओं, विकास और संगठन की ताकत को प्रमुखता से जनता के सामने रखा।
एमपी के इन नेताओं को भी मिली थी जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए भाजपा ने इस बार दूसरे राज्यों के नेताओं को भी रणनीतिक तरीके से जिम्मेदारी दी थी। मध्य प्रदेश से भी कई वरिष्ठ नेताओं को बंगाल भेजा गया था। सीएम मोहन यादव के अलावा रामेश्वर शर्मा, फग्गन सिंह कुलस्ते और डॉ. उमेश नाथ महाराज को भी संगठन और चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी गई थी।
इनमें रामेश्वर शर्मा सबसे लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में सक्रिय रहे। उन्हें जिन 10 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी, वहां भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। पार्टी संगठन अब इसे मध्य प्रदेश के नेताओं की मजबूत चुनावी रणनीति और बूथ स्तर तक की मेहनत का परिणाम मान रहा है।











