सीएम योगी का बड़ा बयान, ‘राजनीतिक कचरा’ हटने से 9 साल में स्वच्छ हुआ यूपी

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By Raj RathorePublished On: April 1, 2026
CM Yogi Blunt Statement

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार सुबह राजधानी में बेहतर कूड़ा प्रबंधन के लिए 250 इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने राजनीतिक कचरे को साफ कर उत्तर प्रदेश में बदलाव की नींव रखी, जिसका परिणाम है कि स्वच्छता के क्षेत्र में डबल इंजन सरकार के प्रयास सफल हुए हैं और रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि 2017 से पहले सत्ताधारी दलों को अंधेरा पसंद था, लेकिन उनकी सरकार सूर्य की उपासक है और सूर्यवंशी श्रीराम के अनुज लक्ष्मण के नाम पर इस लक्ष्मणपुरी में विकास को गति दे रही है। उन्होंने ‘अंधेरे की संस्कृति’ को समाप्त कर प्रदेश को नई दिशा दी है।

स्वच्छता में लखनऊ ने किया कमाल

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि नव निर्माण के नौ वर्षों में आज लखनऊ स्वच्छता रैंकिंग में देश के शीर्ष तीन शहरों में शामिल हो गया है। इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने के लिए ‘नेट जीरो’ लक्ष्य की ओर बढ़ा जा रहा है, जहाँ कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम हो और प्रदूषण रहित व्यवस्था विकसित हो सके। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो स्वच्छ और हरित भविष्य की नींव रखेगी। उन्होंने कहा कि पहले डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन जैसी व्यवस्था की सोच भी नहीं थी और सत्ता में बैठे लोगों के कारनामे भी कूड़े से भरे थे।

अंधेरे से दूधिया रोशनी तक का सफर

मुख्यमंत्री ने 2017 के पहले की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को याद करते हुए बताया कि तब हैलोजन की पीली लाइटें होती थीं, जो अधिक ऊर्जा खपत करती थीं और कीड़े-मकोड़ों के कारण उनके नीचे खड़ा होना भी मुश्किल था। पिछली सरकारों के लिए यह व्यवस्था इसलिए सुविधाजनक थी, क्योंकि उन्हें बिजली देनी ही नहीं पड़ती थी।

“जिनकी आदत डकैती डालना था, उनके लिए अंधेरा ठीक था।” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बिना भेदभाव के 24 घंटे बिजली देने और शहर की लाइटिंग को आधुनिक बनाने का संकल्प लिया। इसी सोच के तहत पूरे शहर को एलईडी लाइटों की ‘दूधिया रोशनी’ में बदलने का कार्य किया गया, जिससे हर नागरिक को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके और अंधेरे की संस्कृति समाप्त हो। अब उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर में जाएं, एलईडी स्ट्रीट लाइटों की दूधिया रोशनी से पूरा शहर जगमगाता दिखाई देता है।

बीमारू से ग्रोथ इंजन तक का बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में अव्यवस्था और गंदगी के कारण इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया और फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारियाँ फैली हुई थीं। जो राज्य विकास का नेतृत्व कर सकता था, वह खुद बीमारू बन गया था, जहाँ मासूमों की असमय मौतें होती थीं। संवेदनहीनता और उपेक्षा का दौर था।

उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है और देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है। बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण के साथ कूड़े से उत्पन्न समस्याओं का भी समाधान किया गया है, क्योंकि जहाँ स्वच्छता होगी, समृद्धि भी वहीं आएगी।

स्मार्ट और सोलर शहरों की ओर

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से 17 नगर निगमों तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा सहित कुल 18 नगर निकायों को ‘सेफ सिटी’ के रूप में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और सीसीटीवी कवरेज से जोड़ा गया है। अब इन्हें ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। सूर्यवंशी श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या 40 मेगावाट के सोलर प्लांट के साथ पूरी तरह सोलर सिटी बन चुकी है, जहाँ की सारी प्रकाश व्यवस्था सौर ऊर्जा से संचालित होती है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 4.25 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जिससे लगभग 1500 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और लोगों के बिजली बिल आधे से कम हो गए हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में अग्रणी

मुख्यमंत्री ने बताया कि आज उत्तर प्रदेश देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, विशेषकर मेट्रो संचालन में अग्रणी बनकर उभरा है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा-ग्रेटर नोएडा सहित सात शहरों में मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। केवल लखनऊ में ही प्रतिदिन लगभग एक लाख लोग मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं। इलेक्ट्रिक बस सेवा का तेजी से विस्तार हो रहा है और सिटी बस सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों में बदला जा रहा है। लखनऊ में अशोक लीलैंड की इलेक्ट्रिक बस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पहले से ही शुरू हो चुकी है, और 15 अप्रैल से टाटा की लखनऊ स्थित ऑटोमोबाइल यूनिट में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माण को आगे बढ़ाया जाएगा। यह दर्शाता है कि सही दिशा में पहल होने पर निवेशक स्वतः आकर्षित होते हैं और विकास को गति मिलती है।