मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं (CSS) के तहत काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के वेतन संकट को दूर करने के लिए अहम कदम उठाया है। अब विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रीयकृत बैंकों में होल्डिंग अकाउंट दोबारा खोले जा सकेंगे। इस फैसले से करीब 3 लाख से अधिक मानदेय और संविदा कर्मचारी, जो महीनों से वेतन के इंतजार में थे, उन्हें समय पर भुगतान मिल सकेगा।
SNA मॉड्यूल के कारण बंद हुए थे खाते, भुगतान अटका
दरअसल, केंद्र सरकार के SNA (Single Nodal Agency) स्पर्श मॉड्यूल लागू होने के बाद पुराने होल्डिंग खाते बंद कर दिए गए थे। CSS योजनाओं में फंडिंग केंद्र और राज्य के बीच साझा होती है, लेकिन तकनीकी तालमेल न बैठ पाने की वजह से भुगतान प्रक्रिया बाधित हो रही थी। इसी समस्या को हल करने के लिए राज्य सरकार ने यह नई व्यवस्था लागू की है।
आंगनवाड़ी, आशा और मनरेगा कर्मियों को सीधा फायदा
इस फैसले का सीधा लाभ महिला एवं बाल विकास विभाग की करीब 1.90 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के एनआरएचएम संविदा कर्मी, आशा कार्यकर्ता और मनरेगा के तहत कार्यरत प्रशासनिक कर्मचारियों को भी अब समय पर मानदेय और वेतन मिल सकेगा।
रिटायर्ड कर्मचारियों से वसूली पर पूर्ण प्रतिबंध
राज्य के वित्त विभाग ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए रिटायर हो चुके अधिकारियों और कर्मचारियों से अतिरिक्त भुगतान की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं हुई है, तो सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी कर्मचारी से वसूली नहीं की जाएगी, खासतौर पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पूरी तरह संरक्षण दिया गया है।
लिखित सहमति होने पर ही होगी रिकवरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वसूली केवल उन्हीं मामलों में संभव होगी, जहां कर्मचारी ने लाभ प्राप्त करते समय लिखित वचन पत्र दिया हो। अन्यथा किसी भी प्रकार की रिकवरी को अवैध माना जाएगा। साथ ही, यदि कोई अधिकारी इन नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ कोर्ट की अवमानना के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर आधारित निर्णय
यह पूरा आदेश न्यायिक निर्देशों के आधार पर जारी किया गया है। इसमें हाई कोर्ट के ‘हरिबाबू चौधरी बनाम मप्र शासन (2026)’ मामले के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के ‘रफीक मसीह’ और ‘जगदीश प्रसाद सिंह’ केस में दिए गए सिद्धांतों को आधार बनाया गया है। इन फैसलों में स्पष्ट किया गया था कि बिना गलती के कर्मचारियों से सेवानिवृत्ति के बाद वसूली करना अन्यायपूर्ण और अवैध है।










