राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मध्य प्रदेश में अपनी दशकों पुरानी प्रांतीय संगठनात्मक व्यवस्था को खत्म करने जा रहा है। 27 मार्च से लागू होने वाले इस बदलाव के तहत राज्य में तीन प्रांतों की जगह सात संभाग और नौ क्षेत्र बनाए जाएंगे। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में लिया गया।
अब तक मध्य प्रदेश को मालवा, महाकौशल और मध्य भारत नामक तीन प्रांतों में बांटा जाता था, जिनका अपना-अपना संघचालक, प्रांत कार्यवाह और प्रांत प्रचारक होता था। नई व्यवस्था में इन प्रांतों की जगह भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा नाम के सात संभाग बनाए जाएंगे। प्रत्येक संभाग का नेतृत्व संभाग प्रचारक करेंगे और उनके अधीन संबंधित कार्यकारी निकाय काम करेगा।
युवाओं को मिलेगा अधिक दायित्व
संघ के मध्य भारत संघचालक अशोक पांडे ने बताया कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को जमीनी स्तर के करीब लाना और संगठनात्मक जिम्मेदारियां युवाओं को सौंपना है। अब विभागीय मॉडल के तहत जिला कार्यकर्ता सीधे विभागीय प्रचारकों से संपर्क कर सकेंगे, जिससे फैसले तेज और प्रभावी तरीके से लिए जा सकेंगे। इसके चलते प्रांतीय स्तर की मध्यस्थता की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
डिविजनल स्तर पर अधिक कार्यकारी पद बनने से युवा स्वयंसेवकों को संगठन में आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर मिलेंगे। पहले उन्हें प्रांतीय स्तर पर पद रिक्त होने का इंतजार करना पड़ता था।
संघ की सेवाएं और प्रशिक्षण में भी बदलाव
मध्य भारत प्रांत के 16 जिलों में संगठन की 2,481 स्थानों पर 3,842 शाखाएं संचालित होती हैं। इनमें से 544 शाखाएं शहरी क्षेत्रों में और 3,298 शाखाएं ग्रामीण जिलों में हैं। इसके अलावा, 736 साप्ताहिक मिलन भी 689 स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं।
सेवा बस्तियों में संघ की 271 सेवा परियोजनाएं सक्रिय हैं, जहां समाज के कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर दिया जाता है। कुल 1,013 सेवा बस्तियों में से 367 में RSS की शाखाएं चल रही हैं।
प्रशिक्षण पद्धति में भी बदलाव किए गए हैं। अब सात दिवसीय प्राथमिक प्रशिक्षण से पहले तीन दिवसीय प्रारंभिक प्रशिक्षण मॉड्यूल जोड़ा गया है। पिछले कुछ महीनों में 179 प्रारंभिक कक्षाओं में 821 वॉलंटियर्स ने भाग लिया, जबकि सात दिन के प्रशिक्षण में 3,485 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया। वरिष्ठ स्तर की ट्रेनिंग मई-जून में प्रस्तावित है।
संगठनात्मक पुनर्गठन के पीछे उद्देश्य
RSS के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, इस पुनर्गठन से मध्य प्रदेश में संघ की निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज और सरल होगी। साथ ही, युवाओं के लिए संगठन में आगे आने के द्वार खुलेंगे। अब राज्य स्तर पर तीन-प्रांतीय ढांचे की जगह एक एकल इकाई होगी, जिसमें कोई राज्य संघचालक नहीं होगा। प्रदेश कार्य समिति समन्वयक निकाय के रूप में कार्य करेगी, जिसमें प्रदेश प्रचारक, प्रदेश कार्यवाह और दो-तीन सहायक सदस्य शामिल होंगे।
“हमारा दायित्व सिर्फ समन्वय तक सीमित रहेगा। संगठनात्मक कार्य मंडल, विभाग और जिला स्तर की कार्यकारी समितियां संभालेंगी।” — अशोक पांडे
नवाचार और सामाजिक जुड़ाव
RSS नेतृत्व ने शाखा में उपस्थिति और समाज से वास्तविक जुड़ाव में फर्क बताया है। संगठन अब केवल शाखाओं में गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा बस्तियों में जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक चेतना के लिए भी कार्य कर रहा है।
27 मार्च को लागू होने वाले इस नए ढांचे से संघ को अपनी कार्यप्रणाली में तेजी, पारदर्शिता और युवाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।










