पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर तेजी से मोड़ दिया है। विशेषकर अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच तनावपूर्ण माहौल ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाकर सोना और चांदी जैसी पारंपरिक सुरक्षित धातुओं में निवेश बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि घरेलू बाजार में चांदी की कीमत 10,460 रुपये उछलकर 2.92 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि सोना 5,260 रुपये की तेजी के साथ 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह उछाल निवेशकों की बढ़ती चिंता और सुरक्षित रिटर्न की तलाश को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की चमक
वैश्विक कमोडिटी बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। न्यूयॉर्क स्थित COMEX पर सोना 5,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गया और इंट्राडे कारोबार में 2.5% से अधिक की मजबूती दर्ज की। वहीं चांदी की कीमत भी उछलकर 96.93 डॉलर प्रति औंस के इंट्राडे हाई तक पहुंच गई, जो करीब 2% की बढ़त को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सुरक्षित ठिकाने की तलाश ने इन धातुओं की मांग को मजबूत आधार दिया है।
अमेरिका-ईरान वार्ता और बढ़ती वैश्विक बेचैनी
रिपोर्ट्स के अनुसार वाशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता अगले सप्ताह भी जारी रहने वाली है। इस प्रक्रिया में Oman मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने बातचीत में कुछ प्रगति के संकेत दिए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारी इस प्रगति की रफ्तार से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। इस अनिश्चित माहौल का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर दिख रहा है, जहां इक्विटी बाजार दबाव में हैं और कीमती धातुओं की मांग तेज बनी हुई है।
विशेषज्ञों का अनुमान: आगे और तेज हो सकती है रफ्तार
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक हालात और बिगड़ते हैं तो सोने-चांदी की कीमतों में और उछाल संभव है। Geojit Investments के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी का कहना है कि चरम परिस्थितियों में सोना वैश्विक स्तर पर 6,000 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है, जबकि भारत में यह 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को भी छू सकता है। विश्लेषकों का यह भी आकलन है कि चांदी 100 डॉलर प्रति औंस का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर सकती है। हालांकि यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की दिशा और आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा।
सालभर में 20% से ज्यादा उछाल, रिकॉर्ड तेजी का दौर
वर्ष 2026 में अब तक सोने की कीमतों में 20% से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। जनवरी के अंत में रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरावट के बावजूद सोना लगातार सातवें महीने बढ़त दर्ज कर चुका है, जो 1973 के बाद की सबसे लंबी तेजी मानी जा रही है। डॉलर के अवमूल्यन की आशंकाएं, व्यापारिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर सवाल और वैश्विक तनाव—इन सभी कारकों ने सोने की बहुवर्षीय तेजी को मजबूती दी है। मौजूदा संकेत बताते हैं कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक कीमती धातुओं में मजबूती का रुख जारी रह सकता है।










