मेट्रो की रफ्तार से चमकेगा इंदौर, सेफ्टी अप्रूवल के बाद 17 किमी तक दौड़ेगी ट्रेन, शहर को मिलेगा बड़ा तोहफा

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By Raj RathorePublished On: February 23, 2026

इंदौर मेट्रो परियोजना के विस्तार को लेकर प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंच गई है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार रेलवे सुरक्षा टीम की हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो सेवा का दायरा करीब 17 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। अभी संचालन सीमित हिस्से तक केंद्रित है, जबकि अगला लक्ष्य अधिक लंबे रूट पर नियमित यात्री सेवा शुरू करना है।

मेट्रो के इस चरण में रेलवे से जुड़े सुरक्षा मानकों का पालन सबसे अहम बिंदु है। जिन हिस्सों में मेट्रो संरचना रेलवे क्षेत्र के पास या तकनीकी रूप से संवेदनशील जोन में आती है, वहां संचालन से पहले सुरक्षा स्वीकृति अनिवार्य होती है। इसी कारण परियोजना प्रबंधन ने तकनीकी परीक्षण, सिस्टम इंटीग्रेशन और सुरक्षा दस्तावेजों की तैयारी को प्राथमिकता दी है।

अधिकारियों का कहना है कि विस्तार से पहले ट्रैक, सिग्नलिंग, विद्युत आपूर्ति, संचार व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की संयुक्त समीक्षा की जाती है। रेलवे सुरक्षा टीम के निरीक्षण में संरचनात्मक स्थिरता, परिचालन सुरक्षा और यात्रियों की निकासी से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच भी शामिल रहती है। अनुमति मिलने के बाद ही विस्तारित खंड में व्यावसायिक संचालन का रास्ता खुलता है।

क्यों जरूरी है रेलवे सुरक्षा मंजूरी

मेट्रो नेटवर्क का विस्तार केवल सिविल कार्य पूरा होने से संभव नहीं होता। जहां भी रेलवे मानकों से संबद्ध इंटरफेस बनता है, वहां स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन जरूरी है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि संचालन के दौरान किसी भी तरह का जोखिम न्यूनतम रहे और सेवाएं तय प्रोटोकॉल के साथ शुरू हों। इंदौर में भी यही प्रक्रिया लागू है और इसी के बाद अगले 17 किमी हिस्से के लिए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

तकनीकी स्तर पर इस मंजूरी में ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रेन कंट्रोल, ट्रैक जियोमेट्री, स्टेशन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा प्रबंधन को परखा जाता है। परियोजना से जुड़े इंजीनियरिंग दल पहले आंतरिक परीक्षण पूरा करते हैं, फिर बाहरी एजेंसी के निरीक्षण के आधार पर सुधार लागू किए जाते हैं। इसके बाद अंतिम क्लीयरेंस जारी होती है।

यात्रियों पर क्या असर होगा

मेट्रो की दूरी बढ़ने से शहर के ज्यादा हिस्सों तक तेज सार्वजनिक परिवहन पहुंच सकेगा। अभी सीमित दायरे में उपलब्ध सेवा का लाभ बढ़कर नए यात्रियों तक जाएगा। इससे सड़क आधारित आवागमन पर दबाव घटने, यात्रा समय में कमी आने और इंटरमॉडल कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

परिवहन विशेषज्ञों के मुताबिक, मेट्रो रूट लंबा होने पर यात्रियों की संख्या में स्थिर वृद्धि देखने को मिलती है, क्योंकि तब सेवा केवल प्रदर्शन खंड से आगे बढ़कर वास्तविक शहरी आवागमन का विकल्प बनती है। इंदौर में प्रस्तावित 17 किमी विस्तार इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

परियोजना की अगली रूपरेखा

परियोजना प्रबंधन की प्राथमिकता सुरक्षा मंजूरी के बाद परिचालन तैयारी को अंतिम रूप देना है। इसमें ट्रेन शेड्यूलिंग, स्टेशन स्तर पर स्टाफ तैनाती, यात्री सूचना प्रणाली और टिकटिंग व्यवस्था का विस्तार शामिल है। चरणबद्ध तरीके से सेवाएं शुरू कर नेटवर्क को स्थिर रूप से चलाने की योजना बनाई जा रही है।

इंदौर मेट्रो के लिए यह चरण प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि परिचालन दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे सुरक्षा टीम से स्वीकृति मिलते ही परियोजना सीमित परीक्षण दायरे से निकलकर विस्तारित शहरी नेटवर्क की ओर बढ़ेगी। यही कारण है कि 17 किमी वृद्धि को शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में प्रमुख बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।