अब घर पर ही हो जाएगा बुजुर्गों का इलाज, ऐप से होगी मॉनिटरिंग, राज्य सरकार ने शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट

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By Raj RathorePublished On: February 6, 2026
Hope App

Hope App : मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। अब प्रदेश के उन बुजुर्गों को अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जो गंभीर बीमारियों या चलने-फिरने में असमर्थता के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत ऐसे बुजुर्गों के लिए ‘होम बेस्ड केयर’ सुविधा शुरू की जा रही है।

फिलहाल इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रदेश के 6 बड़े जिलों में लॉन्च किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को उनके घर पर ही जांच, इलाज और देखभाल की सुविधा मुहैया कराना है, ताकि उन्हें अस्पताल जाने की परेशानियों से बचाया जा सके।

इन 6 जिलों से हुई शुरुआत

सरकार ने इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए राजधानी भोपाल समेत 6 जिलों का चयन किया है। इनमें भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रीवा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रदेश में लगभग एक लाख से ज्यादा ऐसे बुजुर्ग हैं, जिन्हें घर पर ही मेडिकल केयर की सख्त जरूरत है। इस योजना के सफल होने पर इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।

‘होप ऐप’ से काम करेगी योजना

इस पूरी योजना को तकनीक की मदद से संचालित किया जाएगा, जिसके लिए ‘होप ऐप’ (Hope App) बनाया गया है। प्रक्रिया के तहत, आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में ऐसे बुजुर्गों का सर्वे करेंगी जिनकी देखभाल की जरूरत है।

इसके बाद, स्वास्थ्य केंद्र में तैनात नर्सिंग ऑफिसर इन बुजुर्गों का चयन कर उनकी जानकारी होप ऐप में दर्ज करेंगे। अब तक 346 बुजुर्गों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है। रजिस्ट्रेशन के बाद नर्सिंग स्टाफ एक होम किट के साथ बुजुर्गों के घर जाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण करेगा।

घर पर मिलेंगी ये स्वास्थ्य सुविधाएं

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, घर पर दी जाने वाली सुविधाओं में कई चीजें शामिल हैं। नर्सिंग स्टाफ बुजुर्गों का वजन, ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल जैसी नियमित जांच करेगा।

अगर किसी बुजुर्ग को कोई अन्य गंभीर समस्या होती है, तो उन्हें वीडियो कॉल के जरिए ऑनलाइन डॉक्टर से जोड़ा जाएगा। डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर इलाज के बारे में सलाह देंगे। इस योजना में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी और पुनर्वास जैसी सेवाएं भी शामिल की गई हैं। साथ ही, परिवार के सदस्यों को भी बुजुर्गों की देखभाल और समय पर दवा देने के तरीके सिखाए जाएंगे।

भविष्य की जरूरत 

मध्य प्रदेश में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में 57.12 लाख बुजुर्ग हैं। अनुमान है कि साल 2050 तक यह संख्या बढ़कर 1.82 करोड़ तक पहुंच सकती है। ऐसे में यह योजना भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण तैयारी मानी जा रही है।