कानपुर की एक बच्ची खुशी की ज़िंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी है। जन्म से बधिर रही खुशी अब आवाज़ें सुन सकती है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह बदलाव संभव हो पाया है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल और राज्य सरकार की संवेदनशील मदद से।
कुछ समय पहले खुशी ने अपने इलाज की गुहार लगाने के लिए करीब 90 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का साहसिक कदम उठाया था। एक छोटी बच्ची की यह हिम्मत और जज़्बा देखकर हर कोई भावुक हो गया। उसकी कहानी जब मुख्यमंत्री तक पहुंची, तो तुरंत संज्ञान लिया गया।
ऑपरेशन हुआ मुफ्त
खुशी को कॉक्लियर इम्प्लांट की जरूरत थी। इस ऑपरेशन पर छह से सात लाख रुपये का खर्च आना था। परिवार के लिए यह राशि जुटाना असंभव था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले में तेजी आई। समाज कल्याण विभाग ने पहल की। दिव्यांगजन अधिकारी ने समन्वय किया। एक फाउंडेशन ने भी सहयोग दिया।
इन सबके प्रयासों से खुशी के इलाज की पूरी व्यवस्था हो गई। परिवार को एक रुपया खर्च नहीं करना पड़ा।
26 जनवरी को हुआ सफल ऑपरेशन
गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी 2026 को कॉक्लियर इम्प्लांट का ऑपरेशन किया गया। यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। डॉक्टरों की टीम ने बेहतरीन काम किया। ऑपरेशन के बाद खुशी की दुनिया बदल गई। पहली बार उसने आवाजें सुनीं। उसके चेहरे की खुशी देखते ही बनती थी।
थैंक यू योगी जी
जब खुशी मुख्यमंत्री से मिली तो उसके मुंह से पहले शब्द निकले। उसने कहा थैंक यू योगी जी। यह पल सभी के लिए भावुक करने वाला था। जो बच्ची कभी कुछ नहीं बोल पाती थी वह अब टूटे-फूटे शब्द बोलने लगी है। यह उसके जीवन की नई शुरुआत है।
बेहतर होगी बोलने की क्षमता
डॉक्टरों के अनुसार खुशी को नियमित स्पीच थैरेपी दी जा रही है। तीन महीने की थैरेपी से उसकी बोलने की क्षमता काफी बेहतर हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि एक साल के भीतर खुशी सामान्य बच्चों की तरह बातचीत कर सकेगी। वह स्कूल जा सकेगी और पढ़ाई कर सकेगी।
90 किमी की पैदल यात्रा ने बदली किस्मत
खुशी की कहानी प्रेरणादायक है। एक छोटी बच्ची ने हिम्मत दिखाई। वह 90 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची। उसकी इस यात्रा ने सबका ध्यान खींचा। मीडिया में खबर आई। सरकार ने संज्ञान लिया। और आखिरकार उसका इलाज हो गया।
सरकारी योजनाओं का मिला लाभ
खुशी का मामला दिखाता है कि सरकारी योजनाएं कैसे जरूरतमंदों तक पहुंच सकती हैं। समाज कल्याण विभाग की पहल सराहनीय रही। दिव्यांगजन कल्याण की योजनाओं के तहत ऐसे कई बच्चों की मदद की जाती है। कॉक्लियर इम्प्लांट महंगा ऑपरेशन है लेकिन सरकारी मदद से यह संभव हो जाता है।
परिवार में खुशी की लहर
खुशी के परिवार के लिए यह सपने जैसा है। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बच्ची सुन और बोल पाएगी। अब परिवार को उम्मीद है कि खुशी आगे बढ़ेगी। वह पढ़ाई करेगी और अपने पैरों पर खड़ी होगी।
कॉक्लियर इम्प्लांट क्या है
कॉक्लियर इम्प्लांट एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। यह गंभीर बधिरता वाले लोगों को सुनने में मदद करता है। इसे सर्जरी के जरिए कान के अंदर लगाया जाता है। यह उपकरण ध्वनि संकेतों को विद्युत संकेतों में बदलता है। ये संकेत सीधे श्रवण तंत्रिका तक पहुंचते हैं। इससे व्यक्ति आवाजें सुन पाता है।
खुशी की कहानी उन सभी परिवारों के लिए उम्मीद है जिनके बच्चे बधिर हैं। सरकारी मदद और सही इलाज से जिंदगी बदल सकती है।











