इस दबंग आईपीएस अफसर को मिली भोपाल की कमान, कभी नक्सली इलाकों में बाइक से किया था दौरा, कई नक्सलियों को कराया सरेंडर

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By Raj RathorePublished On: January 29, 2026
IPS Sanjay Kumar

IPS Sanjay Kumar : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को नया पुलिस कमिश्नर मिल गया है। आईपीएस अधिकारी संजय कुमार को इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है। 29 जनवरी को उनका ट्रांसफर भोपाल कर दिया गया। संजय कुमार वही अधिकारी हैं जिन्होंने बालाघाट को नक्सल मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई थी।

तीन दशकों तक माओवाद के खौफ में रहा बालाघाट अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है। एक समय था जब नक्सल प्रभावित इलाकों से गुजरना मौत को दावत देने जैसा था। लेकिन सुरक्षाबलों और उनके अधिकारियों की मेहनत ने इस खतरे को समाप्त कर दिया।

सीएम मोहन यादव ने की तारीफ

जब बालाघाट से नक्सलवाद का सफाया हुआ तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संजय कुमार की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये ऐसे अफसर हैं जो जवानों की बाइक पर बैठकर जंगलों की पगडंडियों पर गए। संजय कुमार ने नक्सली इलाकों में खुद जाकर स्थिति का जायजा लिया।

सीएम मोहन यादव हर महीने नक्सल समीक्षा बैठक लेते रहे। इससे ऑपरेशन में तेजी आई। स्थानीय लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाए गए। हॉक फोर्स में अतिरिक्त भर्तियां की गईं। नक्सल मामलों के लिए स्पेशल डीजी की पोस्टिंग भी हुई।

बालाघाट में तीन बार रहे तैनात

आईपीएस संजय कुमार बालाघाट में तीन अलग-अलग समय पर तैनात रहे। साल 2006 में वह पहली बार सीएसपी बनकर आए। इसके बाद 2010 में पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त हुए। फिर 2022 में बालाघाट रेंज के आईजी बनकर लौटे। उन्होंने नक्सलवाद के चरम और उसके अंत दोनों को करीब से देखा। बतौर आईजी उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे तक यहां सेवाएं दीं। उनका कहना है कि बालाघाट मध्य प्रदेश का सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिला रहा।

दोनों दौर में बड़ा अंतर

संजय कुमार कहते हैं कि नक्सलवाद के चरम और अंत में जमीन-आसमान का फर्क है। पहले एक अलग तरह की पुलिसिंग थी। अलग रणनीति और सावधानी रखनी पड़ती थी। अब उसी जंगल में जाते वक्त उतना ध्यान नहीं रखना होता। हालांकि दूसरे राज्यों में नक्सलवाद को देखते हुए जरूरी सावधानियां अब भी बरती जा रही हैं। वेल ट्रेंड फोर्सेस ने लगातार अच्छे ऑपरेशन किए। इन्हीं नीतियों ने नक्सलवाद को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई।

10 सालों में खूब एनकाउंटर

साल 2006 में सीएसपी रहते हुए भी संजय कुमार एंटी नक्सल ऑपरेशन में जाते थे। बतौर एसपी भी वह इन अभियानों में सक्रिय रहे। लेकिन आईजी की भूमिका में एक टारगेटेड अप्रोच अपनाई गई। पूरी फोर्स और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बड़े ऑपरेशन चलाए गए। आखिरी सालों में 10 से ज्यादा एनकाउंटर हुए। इसका श्रेय वह सुरक्षाबलों को देते हैं।

सरेंडर बना टर्निंग प्वाइंट

संजय कुमार 1 नवंबर को मलाजखंड दलम की सुनिता ओयाम के सरेंडर को टर्निंग प्वाइंट मानते हैं। सुनीता ने सटीक जानकारियां दीं। इससे एंटी नक्सल ऑपरेशन में काफी मदद मिली। हालांकि 19 नवंबर को आशीष शर्मा की शहादत से निराशा हुई। इसके बाद जिस दल ने यह काम किया था वह भी डरा हुआ था। नतीजतन उन नक्सलियों ने महाराष्ट्र के गोंदिया जाकर सरेंडर कर दिया।

नई पारी की शुरुआत

अब संजय कुमार भोपाल कमिश्नर के रूप में अपनी नई पारी शुरू करेंगे। उनका अनुभव और कार्यशैली राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। नक्सलवाद के खिलाफ उनकी सफलता ने उन्हें एक धाकड़ अफसर की पहचान दिलाई है। बालाघाट में उनके कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद का पूर्ण खात्मा हुआ। यह उपलब्धि मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। अब भोपाल की जनता को उनसे बेहतर कानून व्यवस्था की उम्मीद है।