इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में मौतों का सिलसिला अभी भी जारी है, लेकिन प्रशासन अब दूषित पानी को इन मौतों का कारण नहीं मान रहा है। बस्ती में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को बद्री प्रसाद की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी मृत्यु हो गई।
प्रशासन ने बद्री प्रसाद की मौत का कारण किसी अन्य गंभीर बीमारी बताया, जिस पर परिजन नाराज हो गए और शनिवार को उन्होंने शव सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों का कहना है कि उनका विरोध मुआवजे के लिए नहीं है, बल्कि बद्री को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद पहले एमवाय अस्पताल और फिर अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाया।
सड़क पर रखा शव
63 वर्षीय बद्रीलाल के निधन के बाद शनिवार सुबह उनके अंतिम संस्कार की तैयारियाँ शुरू हुईं। शव यात्रा घर से मालवा मिल मुक्तिधाम की ओर बढ़ी, लेकिन पुलिया के पास परिजनों ने शव सड़क पर रख दिया और लोगों ने भी सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।
बस्तीवासियों ने किया विरोध
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी भी की और बस्तीवासियों का कहना था कि दूषित पानी की सप्लाई के कारण लगातार मौतें हो रही हैं। प्रशासन अब मौतों को डायरिया से जोड़कर नहीं देख रहा, जबकि बद्रीलाल कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस अधिकारी पहुंचे और परिजनों को समझाइश देकर प्रदर्शन शांत कराया। वहीं, अभी भी दस मरीज आईसीयू में हैं, जिनमें से तीन की स्थिति गंभीर है। हालांकि, अब डायरिया से नए मरीज नहीं आ रहे हैं।










