MP Budget : 1 अप्रैल 2026 से देशभर में 16वां वित्त आयोज लागू हो जाएगा। मध्यप्रदेश सहित सभी राज्यों को इस नए आयोग से केंद्र करों से मिलने वाले हिस्से में बढ़ोतरी की उम्मीद है। एमपी सरकार का मानना है कि यदि केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी सिफारिश अनुसार बढ़ती है, तो प्रदेश के बजट को नई रफ्तार मिल सकती है और सालाना लगभग 5000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड मिल सकता है।
मौजूदा 15वें वित्त आयोग ने राज्यों को केंद्रीय करों का 41 प्रतिशत हिस्सा देने की सिफारिश की थी, जो अभी लागू है। अब नए आयोग के गठन के साथ ही राज्यों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए केंद्र के समक्ष अपनी मांग रखनी शुरू कर दी है।
मध्य प्रदेश की मांग
मध्यप्रदेश सरकार ने वित्त आयोग से प्रदेश की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत करने की सिफारिश की है, यदि ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश के बजट में सालाना 5000 करोड़ रुपए तक की अतिरिक्त राशि आ सकती है। इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर किया जा सकेगा। इससे राज्य को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने और विकास कार्यों में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
कैसे काम करता है वित्त आयोग?
वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन हर पांच साल में राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच करों से होने वाली आय के बंटवारे का फॉर्मूला तय करना है। आयोग राज्यों की जरूरतों, उनकी आय क्षमता, जनसंख्या, क्षेत्रफल और राजकोषीय अनुशासन जैसे कई मानकों के आधार पर अपनी सिफारिशें देता है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की पांच साल की अवधि के लिए होंगी।











