इंदौर में भीख मांगकर करोड़पति बना मांगीलाल, 3 मकान और 2 ऑटो का है मालिक, सराफा व्यापारियों को ब्याज पर देता था पैसे

Author Picture
By Raj RathorePublished On: January 19, 2026

Indore Beggar Story : देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर को ‘भिक्षुक-मुक्त’ बनाने के लिए चल रहे अभियान के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अधिकारियों से लेकर आम लोगों तक को हैरान कर दिया है। नगर निगम की टीम ने जब एक विकलांग भिखारी को रेस्क्यू किया, तो जांच में पता चला कि वह करोड़ो की संपत्ति का मालिक है और उसका पूरा परिवार इसी पेशे में लिप्त है।

यह मामला मांगीलाल नामक भिखारी का है, जो शहर के व्यस्त सराफा बाजार में पटिए पर चलकर भीख मांगता था। उसकी संपत्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके पास तीन मकान, दो ऑटो-रिक्शा और एक कार भी है।

करोड़ों की संपत्ति का मालिक

जांच में अधिकारियों को पता चला कि मांगीलाल के पास भगत सिंह नगर में एक तीन मंजिला मकान और शिवनगर में एक और बड़ा मकान है। इसके अलावा, उसने विकलांगता कोटे के तहत रेड क्रॉस सोसाइटी से भी 10 बाई 20 का एक मकान ले रखा था। इस मकान से उसे किराया भी मिलता था।

यही नहीं, मांगीलाल के पास दो ऑटो-रिक्शा भी हैं, जिन्हें उसने किराए पर दे रखा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसके पास एक कार भी थी, जिसे चलाने के लिए उसने 12,000 रुपये महीने की तनख्वाह पर एक ड्राइवर रखा हुआ था।

सराफा बाजार में ब्याज का धंधा

मांगीलाल की कमाई सिर्फ भीख और किराए तक सीमित नहीं थी। उसने अपनी जमा की हुई रकम से ब्याज का कारोबार भी शुरू कर दिया था। वह इंदौर के प्रसिद्ध सराफा बाजार के कई व्यापारियों को दिन और सप्ताह के हिसाब से ऊंची ब्याज दरों पर पैसा उधार देता था। अधिकारियों के अनुसार, उसका परिवार भीख मांगकर हर साल 10 से 15 लाख रुपये तक कमा लेता था।

ऐसे सामने आई सच्चाई

इंदौर नगर निगम ने शहर को ‘भिक्षुक मुक्त’ बनाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है। इसी के तहत निगम को सराफा बाजार से मांगीलाल के बारे में कई शिकायतें मिल रही थीं। जब निगम की टीम ने उसे रेस्क्यू किया और उसके सामान और बैंक खातों की जांच की तो उसकी असलियत सामने आ गई।

“मांगीलाल सराफा क्षेत्र में सोना-चांदी खरीदने आने वाले ग्राहकों और विदेशी पर्यटकों को निशाना बनाता था, जिससे उसकी अच्छी खासी कमाई हो जाती थी।” — दिनेश मिश्रा, नोडल अधिकारी, भिक्षावृत्ति उन्मूलन समिति

अधिकारियों ने बताया कि साल 2024 की शुरुआत में हुए एक सर्वे में शहर में करीब 6500 भिखारी दर्ज किए गए थे। इनमें से 4000 से ज्यादा लोगों को काउंसलिंग के जरिए इस काम से हटाया गया है, जबकि 1500 से अधिक को उज्जैन के एक आश्रम में भेजा गया है। यह अभियान अभी भी जारी है, लेकिन मांगीलाल के मामले ने इस अभियान से जुड़े अधिकारियों को भी सकते में डाल दिया है।