कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ इंदौर पहुंचे भांडेर विधायक फूल सिंह बरैया का दौरा विवादों में आ गया। मीडिया ने उनसे उनके पूर्व बयान को लेकर सवाल किए, लेकिन विधायक ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने बयान पर अडिग हैं और उसे वापस लेने का कोई इरादा नहीं है। इसी क्रम में उन्होंने दो साल की बच्चियों से जुड़े दुष्कर्म मामलों को लेकर एक और आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी, जिससे विवाद और गहरा गया।
विधायक बरैया का बयान
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक इंटरव्यू में विधायक फूल सिंह बरैया ने दावा किया था कि देश में दर्ज होने वाले बलात्कार के अधिकांश मामले एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग से संबंधित होते हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि किसी आकर्षक महिला को देखकर व्यक्ति की मानसिक स्थिति असंतुलित हो सकती है, जिससे ऐसे अपराध घटित होते हैं। इसके अलावा, उन्होंने बलात्कार जैसी घटनाओं को धर्मग्रंथों से जोड़ते हुए भी बयान दिया था, जिसके बाद इस टिप्पणी को लेकर व्यापक और तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
दौरे में विधायक बरैया का विरोध
इंदौर प्रवास के दौरान विधायक फूल सिंह बरैया को विरोध का सामना करना पड़ा। भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता काले झंडों के साथ प्रदर्शन के लिए सड़कों पर मौजूद थीं, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने राहुल गांधी के काफिले का मार्ग परिवर्तित कर दिया और उसे सीधे एयरपोर्ट तक ले जाया गया। कालानी नगर चौराहे पर भाजपा महिला कार्यकर्ता तख्तियों के साथ एकत्र हुई थीं, हालांकि काफिला वैकल्पिक रास्ते से एयरपोर्ट रोड पहुंच गया, जिससे प्रदर्शनकारी काले झंडे नहीं दिखा सकीं।
जीतू पटवारी की प्रतिक्रिया
विधायक फूल सिंह बरैया के बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध किसी जाति या धर्म से नहीं जुड़े होते, बल्कि ऐसे कृत्य करने वाले केवल अपराधी होते हैं। पटवारी ने कहा कि इस मामले में बरैया के जो विचार सामने आए हैं, वे उनके निजी मत हैं और कांग्रेस पार्टी ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती। पार्टी की ओर से उनसे इस संबंध में स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस को घेरा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी अक्सर मंचों से महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बातें करती हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी के विधायक द्वारा दिए गए आपत्तिजनक और महिला विरोधी बयानों पर उनकी मौन प्रतिक्रिया बहुत कुछ कहती है। यह चुप्पी दिखाती है कि यह कोई व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि कांग्रेस की रणनीति और मानसिकता का हिस्सा है। उनके अनुसार, कांग्रेस के लिए महिला सम्मान सिर्फ एक चुनावी वोट बैंक बनकर रह गया है।
खंडेलवाल ने कहा कि यह मामला केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि दलित समाज की गरिमा, संविधान की आत्मा और सामाजिक सौहार्द से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने जनता से सवाल किया कि क्या यही कांग्रेस की वास्तविक सोच है और क्या ऐसे बयानों पर पार्टी नेतृत्व की चुप्पी सहमति मानी जाएगी। उन्होंने भाजपा की ओर से स्पष्ट मांग करते हुए कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो कांग्रेस को महिलाओं के सम्मान, दलित अधिकार और सामाजिक न्याय की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाएगा।










