प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में आपत्तिजनक या विवादित सवालों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। सरकार का मानना है कि इस तरह के सवाल न केवल परीक्षार्थियों की भावनाओं को आहत कर सकते हैं, बल्कि इससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी भर्ती एजेंसियों और बोर्डों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय विशेष सावधानी बरती जाए और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या असंवेदनशील सामग्री शामिल न की जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सभी भर्ती बोर्डों के अध्यक्षों को निर्देश देते हुए कहा है कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था और मर्यादा से जुड़े विषयों पर अमर्यादित टिप्पणी किसी भी परिस्थिति में शामिल नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र बनाने वाली टीमों को पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं, ताकि परीक्षा की प्रक्रिया संवेदनशील और जिम्मेदार बनी रहे।
पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के सवाल से खड़ा हुआ विवाद
शनिवार को उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक सवाल ने नया विवाद खड़ा कर दिया। परीक्षा में एक बहुविकल्पीय प्रश्न पूछा गया था—‘अवसर के अनुसार बदलने वाला।’ इस सवाल के उत्तर के रूप में जो विकल्प दिए गए थे, उनमें एक विकल्प ‘पंडित’ भी शामिल था। इस विकल्प को लेकर कई परीक्षार्थियों और लोगों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया और सोशल मीडिया पर भी इसकी आलोचना होने लगी।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की मांग
इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री Abhijat Mishra ने सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई। वहीं उप मुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने इस विवाद को गंभीरता से लेते हुए तुरंत संज्ञान लिया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने का फैसला किया।
बार-बार गलती करने वालों पर लगेगा प्रतिबंध
मुख्यमंत्री ने रविवार को कहा कि यदि कोई प्रश्नपत्र तैयार करने वाला बार-बार इस तरह की गलती करता है तो उसे ‘आदतन उल्लंघन करने वाला’ यानी हैबिचुअल ऑफेंडर माना जाएगा। ऐसे व्यक्तियों या संस्थाओं को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों या एजेंसियों के साथ किए जाने वाले एमओयू में भी इस प्रावधान को शामिल किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बन सके।
भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर
सरकार का मानना है कि इन सख्त निर्देशों से भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहेगी। साथ ही किसी भी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले विवादों से भी बचा जा सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षाओं में शालीनता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता बनाए रखना सभी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है, और भविष्य में ऐसी लापरवाही बिल्कुल भी स्वीकार नहीं की जाएगी।










