राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के उद्देश्य से औषधीय एवं सुगंधित पौधों का कृषिकरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत लेमनग्रास की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ कमाने का एक उत्कृष्ट विकल्प बनकर उभर रही है।
किसानों को मिलती है अच्छी आय
लेमनग्रास (नींबू घास) किसानों के लिए एक बेहतरीन, कम लागत, अधिक मुनाफे वाली फसल है, जिसे बंजर या पथरीली ज़मीनों पर भी उगाया जा सकता है और यह कम पानी व कम देखभाल में साल में 4-5 बार कटाई देती है, जिससे 1 लाख/एकड़ तक की कमाई संभव है, क्योंकि इसके तेल की मांग परफ्यूम और कॉस्मेटिक्स में बहुत है, साथ ही चाय और दवाइयों में भी इसका उपयोग होता है, जिससे किसानों को अच्छी आय मिलती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टर और कृषि विभाग को औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वन मंत्री केदार कश्यप तथा छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम लगातार किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
लेमनग्रास खेती के लिए निःशुल्क पौधे व तकनीकी सहायता
औषधि पादप बोर्ड द्वारा लेमनग्रास की खेती करने वाले किसानों को निःशुल्क स्लिप्स (पौधे) प्रदान किए जा रहे हैं। खेती को बेहतर ढंग से विकसित करने के लिए 40-50 किसानों का 1-2 किलोमीटर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर खेती कराई जाती है। बोर्ड गैर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता, मार्केटिंग सहयोग और खरीदी के लिए एमओयू की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।
निःशुल्क प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण
किसानों को लेमनग्रास की खेती से संबंधित संपूर्ण जानकारी देने के लिए बोर्ड द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण आयोजित किए जाते हैं। इसमें खेत तैयार करने, पौध रोपण, देखभाल से लेकर आसवन प्रक्रिया के जरिए तेल निकालने तक की पूरी तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।









