इंदौर दूषित जल मामलें में सीएम ने की बड़ी कार्रवाई, नगर निगम आयुक्त को जारी किया कारण बताओ नोटिस, अपर आयुक्त को हटाने के दिए निर्देश

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By Raj RathorePublished On: January 2, 2026
Mohan Yadav

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। सीएम ने न केवल वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय की है, बल्कि तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाने के निर्देश भी जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री ने आज सुबह मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में इंदौर के दूषित जल प्रकरण को लेकर राज्य शासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा हुई, जिसके आधार पर सीएम ने कई अहम फैसले लिए।

निगम आयुक्त को नोटिस, अपर आयुक्त हटाए गए

समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त निर्देश दिए। इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस मामले में ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी करने को कहा गया है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने और अधिक कड़ाई बरतते हुए अपर आयुक्त को तत्काल प्रभाव से इंदौर से हटाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रभारी अधीक्षण यंत्री से छीना गया प्रभार

प्रशासनिक फेरबदल यहीं नहीं रुका। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार तुरंत वापस ले लिया जाए। जल वितरण में हुई गड़बड़ी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हुए यह कदम उठाया गया है। साथ ही, इंदौर नगर निगम में कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक रिक्त पदों को तत्काल प्रभाव से भरने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें कोताही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। गौरतलब है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ गए थे। इस घटना के बाद से ही स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे।