भारत मंदिरों का देश है, जहां कई प्राचीन मंदिर अपनी गौरवशाली विरासत के साथ स्थापित हैं। ये मंदिर न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि अपनी चमत्कारी और रहस्यमयी घटनाओं के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों की महिमा अद्वितीय है, लेकिन इनके गूढ़ रहस्यों को आज तक कोई पूरी तरह समझ नहीं पाया है। ऐसा ही एक रहस्यमय मंदिर असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या देवी मंदिर है, जिसे देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का योनि-कुंड स्थापित है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव माता सती के जले हुए शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के टुकड़े किए। इस दौरान माता का योनि अंग इसी स्थान पर गिरा था।

परंपरागत मान्यताओं की झलक
कामाख्या देवी मंदिर को लेकर भक्तों की गहरी आस्था है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां माता के दर्शन कर लेता है, उसके सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। यह मंदिर तांत्रिक और अघोरियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है, जिसके कारण इसे उनका प्रमुख साधना स्थल माना जाता है। दूर-दूर से तांत्रिक और अघोरी यहां अपनी साधनाएं करने आते हैं। आज हम आपको इस रहस्यमयी मंदिर से जुड़े कुछ अनोखे तथ्यों के बारे में बताएंगे, जिन्हें जानकर आप भी चौंक जाएंगे। तो आइए, जानते हैं इसके रहस्यों के बारे में।
मूर्ति नहीं दिव्य कुंड की होती है आराधना

कामाख्या देवी मंदिर देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां एक पत्थर के रूप में योनि-कुंड है जो सदैव फूलों से ढका रहता है, जिसे भक्त पवित्र जल से स्नान कराते हैं और पूजते हैं। कहा जाता है कि इस कुंड से प्राकृतिक रूप से जल का प्रवाह होता रहता है। ऐसी भी मान्यता है कि जो भक्त इस मंदिर के तीन बार दर्शन कर लेता है, वह सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाता है।
रहस्यमयी तरीके से लाल होता है ब्रह्मपुत्र का पानी
असम में बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का जल हर साल तीन दिनों तक लाल हो जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान मां कामाख्या रजस्वला होती हैं, जिसके प्रतीक स्वरूप नदी का पानी लाल पड़ जाता है। इन तीन दिनों में मंदिर के द्वार बंद रहते हैं, और किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं होती। हालांकि, चौथे दिन मंदिर के कपाट खुलने के बाद भक्त बिना किसी रोक-टोक के माता के दर्शन कर सकते हैं। इस अवधि में एक विशेष प्रसाद भी वितरित किया जाता है। मां के रजस्वला काल में मंदिर में एक सफेद वस्त्र रखा जाता है, जो तीन दिनों बाद लाल रंग में परिवर्तित हो जाता है। इसी वस्त्र को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है।