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PoK में बांध बना रहा चीन, डूबेगी भारत से जुड़ी ये ऐतिहासिक धरोहर

नई दिल्ली: चीन भारत के खिलाफ लगातार साजिश रचता जा रहा है। माउंट एवरेस्ट पर अपने 5जी नेटवर्क स्थापित करने के बाद अब चीन पाक अधिकृत कश्मीर में मौजूद गिलगित-बाल्टिस्तान में एक बांध बनाने जा रहा है। चीन के यहां बांध बनाने से दियामीर, हुन्जा, नगर और बाल्टिस्तान जिले के कई इलाके पानी में डूब जाएंगे।

ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की मांग

चीन के बांध बनाने के कदम के साथ ही गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्थानीय लोगों के बीच मांग उठने लगी है कि पहले उस इलाके की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाया जाए। बांध बनाने से जो चार शहर पानी में डूबेंगे उनमें बेहद कीमती ऐतिहासिक धरोहर हैं। इन चारों शहरों में सैकड़ों की संख्या में बौद्ध धर्म से जुड़े हुए पत्थरों पर पौराणिक कलाकृतियां हैं।

ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बांध बनेगा तो ये कलाकृतियां पानी में डूब जाएंगी। इसलिए बांध बनने से पहले इन्हें कहीं संजो कर रखा जाए। गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्थानीय निवासी और इतिहास प्रेमी अरैब अली बेग ने इन ऐतिहासिक रॉक आर्ट की तस्वीरें ट्विटर पर शेयर की हैं।

historical heritage of buddhism

इन तस्वीरों को शेयर करते हुए अरैब अली बेग ने लिखा कि ‘पत्थरों पर ऐसी कलाकृतियां दियामीर, हुन्जा, नगर और बाल्टिस्तान में कई स्थानों पर देखने को मिल जाएंगी।’

सम्राट अशोक के समय बनाई गई थी ये कलाकृतियां

माना जाता है कि पत्थरों पर ये कलाकृतियां 269 से 232 ईसा पूर्व में सम्राट अशोक के समय बनाई गई थीं, जो पुराने सिंधु मार्ग की निशानियां है। फिर 14वीं और 15वीं सदी में जब मुस्लिम इस इलाके में आए तो उन्होंने इसे बर्बाद करने की कोशिश की लेकिन अब भी इनमें से कई पत्थरों पर कलाकृतियां सुरक्षित हैं।

पाकिस्तान सरकार ने दिया 20,797 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

ख़बरों के मुताबिक़ गिलगित-बाल्टिस्तान में बांध बनाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने चीन की कंपनी को 20,797 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट दिया है। ये बांध दियामीर शहर में बन रहा है। इससे चार शहरों के करीब 50 गांव पानी में डूब जाएंगे।

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ऐसे में इन ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर गिलगित-बाल्टिस्तान के कई मुस्लिम विद्वानों ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। सब कह रहे हैं कि इन धरोहरों को बचाने की जरूरत है।

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एक शख्स ने लिखा है कि ये धरोहर बौद्ध धर्म के हैं, लेकिन इनसे इस इलाके में पर्यटन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।इसलिए पाकिस्तान और चीन दोनों को चाहिए कि पहले इस कलाकृतियों को सुरक्षित करें, उसके बाद डैम बनाएं।