सनातन धर्म में रुद्राक्ष को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. कुल मिलाकर 14 मुखी रुद्राक्ष पाए जाते हैं. जिसके अलावा गौरी शंकर और गणेश रुद्राक्ष भी पाए जाते हैं. जिसको धारण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं. और ऐसी भी मान्यता हैं कि रुद्राक्ष अकाल मृत्यु को हर लेता हैं और शत्रु बाधा से भी जातक की रक्षा करता है.

संसार में बहुतों की तादाद में मनुष्य रुद्राक्ष का प्रयोग करते हैं. रुद्राक्ष का उपयोग पूजा में, मंत्रों के जप में भी किया जाता है. वास्तव में रुद्राक्ष एक पेड़ के फल की गुठली है जिसका औषधीय और आत्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न हुए हैं. जिसको धारण कर लेने मात्र से ही ये विशेष फल देते हैं.और साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि रुद्राक्ष अकाल मृत्यु को हर लेता हैं और शत्रुओं से बचाव करता है. कुल मिलाकर 14 मुखी रुद्राक्ष पाए जाते हैं. जो भी व्यक्ति इन रुद्राक्षों का प्रयोग करता हैं उन्हें इसका फायदा अवश्य ही मिलता हैं.

रुद्राक्ष पहनते समय बरतें ये सावधानी

रुद्राक्ष को लाल धागे या पीले धागे में पहनना चाहिए. इसे पूर्णिमा, अमावस्या या सोमवार को धारण करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. रुद्राक्ष एक, सत्ताईस, चौवन या एक सौ आठ की संख्या में ही पहनना चाहिए. जिसको धारण करने के बाद मांस और मदिरा का सेवन करना त्याग देना चाहिए। रुद्राक्ष को धातु के साथ पहनना और भी अच्छा होता है.साथ ही रुद्राक्ष को सोने और चांदी के साथ धारण किया जा सकता है. या फिर आप चाहे तो तांबे के साथ भी इसे धारण कर सकते हैं. साथ ही किसी अन्य व्यक्ति की धारण की हुई रुद्राक्ष की माला ना पहनें. रात्रि में सोते समय रुद्राक्ष को ध्यान से उतार कर सोना चाहिए.

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रुद्राक्ष धारण करने के फायदे

1. जल्द विवाह के लिए दो मुखी रुद्राक्ष या गौरी शंकर रुद्राक्ष का धारण करें.

2. शिक्षा,कंसन्ट्रेशन और परिश्रम के लिए पंच मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.

3. सेहत और दीर्घायु होने के लिए एक मुखी या 11 मुखी रुद्राक्ष का धारण करें.

4. नौकरी की बाधाओं से बचने के लिए और आय के नए स्तोत्र के लिए तीन मुखी रुद्राक्ष का धारण करें.

5. बुरी आदतों से बचने के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

रुद्राक्ष को घिसकर इसका तिलक लगाने से तेज और सौंदर्य में इजाफ़ा होता है. माथे पर इसका लेप लगाने से मानसिक शांति मिलती है. शिक्षा में अच्छे परिणाम मिलते हैं. रुद्राक्ष पहनने से तनाव से दूर रहते हैं.

राशि के अनुसार ही धारण करना चाहिए

मेष और वृश्चिक राशि वाले जातकों के लिए तीन मुखी रुद्राक्ष सर्वोत्तम होता है. यह रुद्राक्ष अग्नि और तेज का स्वरूप होता है. वृष और तुला राशि वाले जातकों के लिए छह मुखी रुद्राक्ष सर्वोत्तम होता है. छह मुखी रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय का रूप माना जाता है. मिथुन और कन्या राशि वाले जातकों के लिए चार मुखी रुद्राक्ष सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. जिसे ब्रह्मा जी का स्वरूप माना जाता है. कर्क राशि वाले जातकों के लिए दो मुखी रुद्राक्ष सबसे श्रेष्ठ और खास होता है. यह अर्धनारीश्वर का आकर माना जाता है. सिंह राशि वाले जातकों के लिए एक मुखी रुद्राक्ष सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. यह शिव जी का स्वरूप माना जाता है. धनु और मीनराशि वाले जातकों के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष उत्तम माना जाता है. इसको कालाग्नि भी कहते हैं. मकर और कुंभ वाले जातकों के लिए सात मुखी रुद्राक्ष सबसे उपयुक्त रुद्राक्ष माना जाता है. यह सप्तमातृका तथा सप्तऋषियों का स्वरूप माना जाता है.