कोविड-19 के शुरूआती दौर में दुनिया में हाहाकार मंच गया था। चारों ओर डर का माहौल बन गया था। लोग घरों से निकलने से डरते थे। इतना ही नही अपने मेहमानों के साथ भी पराये जैसा व्यवहार करते थे। यहां तक की पड़ोसियों के घर जाने में भी कतराते थे। इसी बीच कई लोगों व अधिकारियों ने डटकर महामारी का सामना किया था। इसी दौरान बड़नगर तहसील में कलेक्टर आशीष सिंह ने कई सेवाएं दी थी।

उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह ने कोविड-19 के शुरूआत दौरान बड़नगर तहसील में 70 बेड के अस्पताल की स्थापना करने एवं 383 से अधिक रोगियों का उपचार कराया था। इस कार्य के लिए उन्हें इंडियन एक्सप्रेस ने एक्सीलेंस इन गवर्नेंस अवार्ड (डिजास्टर मैनेजमेंट केटेगरी) से नवाजा गया है। उक्त अवार्ड की घोषणा विगत 17 जनवरी को दिल्ली में की गई थी।

गौरतलब है कि, महामारी के शुरूआत से लेकर अब डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारियां बड़ी इमादारी से निभा रहें है। वही बीते दौर में जाए तो शुरूआत में कोराना से चारों ओर डर का माहौल बन गया था। सड़के विरानी सी लगने लगी थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों के साथ मिलकर कुछ लोगों ने डटकर सामना किया था। उस दौरान जिसको जो जिम्मेदारी दी गई थी। उसको खुद का काम समझकर किया गया था।

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लोगों ने खुद की समझदारी से घरों में अपने आपको बंद कर लिया गया था। बचाव के सभी नियमों को ध्यान में रखकर पालन किए गए थे। जैसी ही कोविड वैक्सीन आई लोगों ने जिम्मेदारी के साथ लगवा ली थी। इसी लिए भारत में कोरोना पर लगाम लगा लिया गया था।

वही अगर चीन की बात करें तो वहां पर इस समय भी अस्पतालों से लेकर श्मशान घटों की बात की जाए थे। उपचार के लिए जाए या फिर अंतिम संस्कार के लिए लंबी-लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। यहां तक लोग शवों को सड़कों पर जलाने के लिए मजबूर हो गए है। इतनी भयावह स्थिति बन गई है। ऐसा इसलिए हुआ कि चीन जीरो कोविड पॉलिसी के तहत लोगों को जबरन घरों में केद करके रखा गया था। वो भा सख्त पांबधियों के साथ, इस दौरान लोगों ने सरकार पर दबाव बनाया। फिर सरकार ने पांबदियों में थोड़ी डिल देना शुरू किया तो इसलिए भयानक स्थिति हो गई है।