आज है राधाष्टमी, एक व्रत से मिलेगा अपार धन और ढेरों खुशियों का आशीर्वाद

0
358
radha krishna

राधा रानी को कृष्ण की प्रेयसी कहा जाता हैं, और कृष्ण के जन्म के 15 दिनों बाद ही राधा रानी का जन्म हुआ था। बरसाना में बड़ी ही धूमधाम से इस पर्व को त्योहार की तरह ही मनाया जाता है। भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष में अष्टमी तिथी को राधा के जन्मोत्सव के रुप में राधाष्टमी के रुप में मनाया जाता हैं। इस साल राधाष्टमी 6 सितंबर को मनाई जाएगी। इस साल मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा अपने भक्तों पर बनी रहती हैं।

गौड़ीय वैष्णव समाज में राधाष्टमी का महत्व है। गौड़ीय वैष्णव इस तिथि का बड़ा ही आदर करते हैं। राधिका कृष्ण की पूणर्तमा शक्ति एवं स्वयं ईश्वरीय हैं। उन्हीं से सभी शक्तियों का दुभार्व हुआ है। इसलिए हर कोई राधाष्टमी को जयन्ती कहना चाहते हैं और उस दिन कृष्ण जन्माष्टमी समान निर्जल उपवास करते हैं।

राधाष्टमी के दिन मां लक्ष्मी खुश होकर अपने भक्तों को अपार धन और ढेरों खुशियों का आशीर्वाद देती है। इस दिन व्रत रहने से घर में सदा ही लक्ष्मी का वास होता है। सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जीवन सुखमय हो जाता है। इसके अलावा संतान के सुखद और दीर्घ जीवन के लिए भी राधाष्टमी का व्रत करना आवश्यक माना गया है। महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए भी यह व्रत करती हैं।

राधा जी भगवान कृष्ण को प्राणों से प्रिय हैं, तो श्रीकृष्ण राधा जी के इष्टदेव हैं। भगवान ने स्वयं राधारानी के बारे में कहा है कि उनके समान कोई दूसरा नहीं है। उनके सामने तो करोड़ों महालक्ष्मी भी नहीं ठहरती हैं। उनकी सुंदरता और गुणों का बखान कोई नहीं कर सकता। वह स्वयं भी उनके गुणों का बखान कर पाने में असमर्थ हैं।

राधाजी भगवान कृष्ण की अधिष्ठात्री देवी हैं। जिनकी सुंदरता और गुणों पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण मुग्ध हैं तो राधा अपना सर्वस्व निछावर करके उनसे प्रेम करती हैं। पुराणों में राधा को भगवान श्रीकृष्ण की आत्मा बताया गया है, इसलिए ही भगवान कृष्ण राधारमण कहलाए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here