इस बार अक्षरधाम मंदिर की प्रतिकृति में विराजेंगे इन्दौर के राजा

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इन्दौर: मध्यप्रदेष ही नहीं पूरे भारत में ख्याति अर्जित कर चुका इन्दौर का राजा गणेषोत्सव में इस बार इन्दौर के राजा गुजरात के गांधीधाम स्थित विष्वप्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर की प्रतिकृति में विराजेंगे । यह जानकारी देते हुए आलोक दुबे फाउंडेषन के फाउंडर आलोक दुबे ने बताया कि इस बार इन्दौर के राजा का दस दिवसीय भव्य गणेषोत्सव कार्यक्रम दिनांक 13 से 23 सितम्बर तक  विजय नगर चैराहा स्थित इन्दौर विकास प्राधिकरण के खुले मैदान पर रखा गया है ।
उन्होंने बताया कि अक्षरधाम मंदिर की भव्य प्रतिकृति साढे बारह हजार स्केयर फिट में बनाई जा रहीर है और इसे मुर्त रूप देने का कार्य 90 कारीगरों व्दारा पिछले एक माह से किया जा रहा है । श्री आलोक दुबे ने कहा कि मेरे संयोजन में तीन सालों तक दषहरा मैदान तथा पिछले साल गांधी हाल परिसर में इन्दौर के राजा का कार्यक्रम किया गया था लेकिन इस बार गांधी हाल में जीर्णोद्धार कार्य चलने के कारण अब इसे विजयनगर चैराहे पर किया जा रहा है । इन्दौर के राजा के कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में कई कीर्तिमान रचे गए हैं, जैसे विष्व का सबसे बड़ा अस्थाई गणपति पांडाल होने का कीर्तिमान बनाया है । इसके साथ ही पिछले साल लाखांे श्रद्धालुओं ने इन्दौर के राजा के दर्षन किए थे यह भी अपने आप में कीर्तिमान है ।

श्री आलोक दुबे ने कहा कि नदियों के जल को सरंक्षित रखने के लिए हमनें गणेष जी की मूर्ति का विसर्जन वहीं उसी स्थान पर किया और विसर्जन से निकलने वाली मिट्टी में बीज लगाकर हमनें सीडबाॅल पद्धति से पर्यावरण को सरंक्षित किया । पूरे उत्सव के दौरान हमनें प्रांगण से प्रसाद का वितरण नहीं करते हुए एम.वाय. में प्रतिदिन जरूरतमंदों को भरपेट भोजन कराकर प्रसाद के रूप में वितरित किया । इसके अलावा अंगदान को प्रोत्साहन देने के लिए 30 हजार से अधिक लोगों से अंगदान के धोषणा पत्र भरवा कर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित किया । उन्होंने कहा कि उनका प्रयास यह है कि हम हमारी सांस्कृति धरोहर को सहेजने के साथ ही समाज में एक सकारात्मक संदेष प्रसारित करें ।

श्री आलोक दुबे ने बताया कि अक्षर धाम की प्रतिकृति की पांच मंजिला इमारत बनाने के लिए 90 कारीगर कार्यरत हैं और इस भव्य इमारत के जमीन तल से 151 फुट की उंचाई पर केसयिा धर्मध्वजा लहराई जाएगी । उन्होंने कहा कि इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी भी प्रकार का जनसहयोग नहीं लिया जाता । मंदिर को लेकर अधिक जानकारी देते हुए श्री दुबे ने बताया कि प्रतिकृति 100 बाया 125 स्केयर फुट में बन रही है इसके अंदर की ओर 90 बाय 30 का विषाल गर्भगृह बनाया गया है जिसके बीच में कोई भी पिल्लर नहीं है । इस गर्भगृह के अंदर आकृति महलनुमा बनाई जा रही है । इसकी छत और दीवारों को इस प्रकार से बनाया जा रहा है कि देखने वालों को अक्षरधाम मंदिर की याद ताजा हो जाएगी । इसके साथ ही यहां पर कलाकृतियां और झूमर इसके आकर्षण को दुगुना कर देंगे । उन्होंने कहा कि गणेषोत्सव के पांचवें साल में इस विषाल स्ट्क्चर को बनाने के लिए 21 हजार बांस, 10 हजार रनिंग मीटर कपड़ा, 15 फुट की 101 बल्लियों के साथ दो ट्क थर्माकोल का उपयोग किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि हमारे फांउडेषन का उदृदेष्य पर्यावरण हितैषी उत्सव मनाना है इसलिए इस उत्सव और इस विषाल प्रतिकृति में लगने वाला सारा सामान रियूज होगा । यह पंडाल पूरे तरह से जीरो वेस्ट झोन रहेगा ।

श्री आलोक दुबे ने कहा कि इन्दौर के राजा में पूर्व के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री षिवराजसिंह आ चुके हैं और इस साल भी वे पधारेंगे । इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, सभी विधायक गण और गणमान्य अधिकारी तथा नेतागण रात 8 बजे होने वाली आरती में शामिल होंगे ।

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