How To Become Pitch Curator : क्रिकेट के मैदान पर हर चौके-छक्के और विकेट के पीछे एक गुमनाम नायक की मेहनत होती है, जिसे पिच क्यूरेटर कहा जाता है। किसी भी मैच का रोमांच और नतीजा काफी हद तक पिच के मिजाज पर निर्भर करता है, और इस मिजाज को तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी क्यूरेटर की होती है। ये तय करते हैं कि पिच गेंदबाजों की मददगार होगी या बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग बनेगी।
पिच क्यूरेटर का काम सिर्फ मैदान की घास काटना या पानी देना नहीं है, बल्कि यह एक विशेषज्ञ की भूमिका है। मैच किस दिशा में जाएगा, इसका पहला संकेत पिच को देखकर ही मिलता है और इसे बनाने वाले क्यूरेटर ही होते हैं।
भूमिका और जिम्मेदारियां
एक पिच क्यूरेटर कई महत्वपूर्ण फैसले लेता है जो सीधे तौर पर मैच को प्रभावित करते हैं। उनकी मुख्य जिम्मेदारियों में पिच की नमी को नियंत्रित करना, घास की लंबाई तय करना और पिच को रोल करना शामिल है।
उदाहरण के लिए, अगर पिच पर ज्यादा घास छोड़ी जाती है, तो यह तेज गेंदबाजों को मदद करती है। वहीं, सूखी और टूटी हुई पिच स्पिन गेंदबाजों के लिए फायदेमंद साबित होती है। क्यूरेटर को मौसम, टीमों की रणनीति और टूर्नामेंट की जरूरतों को ध्यान में रखकर पिच तैयार करनी होती है।
कैसे बन सकते हैं पिच क्यूरेटर?
पिच क्यूरेटर बनना एक सामान्य पद नहीं है, इसके लिए विशेष योग्यता और अनुभव की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए क्रिकेट की गहरी समझ और मैदान पर काम करने का अनुभव होना अनिवार्य है।
सबसे पहले, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा आयोजित क्यूरेटर सर्टिफिकेशन कोर्स को पूरा करना होता है। BCCI इसके लिए लेवल-1 का कोर्स कराता है। इस कोर्स के अलावा, कई राज्य क्रिकेट संघ भी समय-समय पर क्यूरेटर के पदों के लिए भर्तियां निकालते हैं। इस भूमिका के लिए उम्मीदवार को पिच की मिट्टी, घास और मौसम की अच्छी समझ होनी चाहिए।
कितनी होती है कमाई?
पिच क्यूरेटर का वेतन उनके अनुभव और वे किस क्रिकेट बोर्ड के साथ काम कर रहे हैं, इस पर निर्भर करता है। यह एक आकर्षक करियर विकल्प हो सकता है।
अगर राज्य क्रिकेट बोर्ड के पिच क्यूरेटर की बात करें, तो उन्हें हर महीने लगभग 20,000 से 30,000 रुपये तक का वेतन मिलता है। वहीं, BCCI के साथ काम करने वाले मुख्य क्यूरेटर की सैलरी काफी ज्यादा होती है। उन्हें प्रति माह 40,000 से 80,000 रुपये के बीच वेतन मिल सकता है। इसके अलावा, सैलरी के साथ-साथ हर मैच के हिसाब से अलग से भत्ता भी दिया जाता है, जो उनकी कमाई को और बढ़ाता है।










