रोड रेज मामले में सरेंडर करने घर से निकले सिद्धू, राहत के लिए खटखटाया SC का दरवाजा

मनु सिंघवी की ओर से चीफ जस्टिस की कोर्ट में इस मामले को लेकर अर्जी दायर नहीं की गई. क्योंकि कुछ दिनों पहले ही चीफ जस्टिस एनवी रमणा ने यह कह दिया था कि अर्जेंट मेंशनिंग में दर्ज मामलों के अलावा कोई भी नया केस नहीं सुना जाएगा, जो लिस्ट में नहीं है.

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें लगातार बढ़ रही है 34 साल पुराने रोडवेज मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से उन्हें 1 साल की सजा सुनाई गई है और इसी आदेश का पालन करते हुए नवजोत पटियाला कोर्ट में सरेंडर करने के लिए अपने घर से निकल गए है. बता दें कि सिद्धू के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने राहत मिलने की आशा के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में नवजोत सिंह सिद्धू की खराब सेहत का हवाला देते हुए सरेंडर के लिए वक्त देने की मांग की है जिस पर जस्टिस खानविलकर की पीठ ने कहा कि यह मामला विशेष पीठ से संबंधित है इसलिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अर्जी दायर करें.

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मनु सिंघवी की ओर से चीफ जस्टिस की कोर्ट में इस मामले को लेकर अर्जी दायर नहीं की गई. क्योंकि कुछ दिनों पहले ही चीफ जस्टिस एनवी रमणा ने यह कह दिया था कि अर्जेंट मेंशनिंग में दर्ज मामलों के अलावा कोई भी नया केस नहीं सुना जाएगा, जो लिस्ट में नहीं है. इसी को देखते हुए कहा जा रहा है कि अब नवजोत सिंह सिद्धू के सामने सरेंडर कर के जेल जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है. कहां यही जा रहा है कि सिद्धू की सेहत का हवाला देते हुए उन्हें राहत देने की मांग की जाएगी. वकीलों द्वारा कई कानूनी दांव आजमाए जा रहे हैं. सिद्धू की जांच रिपोर्ट का सहारा लेकर मोहलत लेने की कोशिश की जा रही है.

बता दें कि 20 मई के बाद कोर्ट में गर्मी की छुट्टियां शुरू हो रही है, जो 51 दिन तक चलेगी. इस समय में सिर्फ अर्जेंट मामलों पर ही सुनवाई की जाएगी. हालांकि कोर्ट की ओर से अर्जेंट सुनवाई के लिए ग्रीष्मकालीन बेंच के अलावा पांच अन्य बेंच भी बनाई गई है, यह सभी लंबे समय से पेंडिंग पड़े मामलों पर सुनवाई करेगी