धर्मव्रत / त्यौहार

इस जगह है विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर, ये है वहां की खासियत

आज सावन का दूसरा सोमवार है। श्रावण का महीना हिन्दू धर्म में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पावन महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। आज हम आपको शिव जी के एक सबसे बड़े मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। आपको बता दे, हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं वो तमिलनाडु के तिरुवनमलाई जिले में है। ये विश्व का सब बड़ा शिव मंदिर है। यहां पर भोलेनाथ ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया था। ये एक अनोखा मंदिर है।

अन्नामलाई पर्वत की तराई में स्थित इस मंदिर को अनामलार या अरुणाचलेश्वर शिव मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर के पर्वत की लंबाई 14 किलोमीटर है। यहां लोग दूर दूर से मन्नत मांगने आते हैं। ऐसा कहा जाता है यह मंदिर शिव जी का सबसे बड़ा मंदिर है। यहां सावन में सबसे अधिक भीड़ होती है। लेकिन इस साल कोरोना के चलते यहां जल चढ़ाना और पूजा करने की प्रक्रिया बंद कर रखी है।

ऐसे पहुंचें इस मंदिर –

चेन्नई से तिरुवनमलाई की दूरी 200 किलोमीटर है। चेन्नई से यहां बस से भी पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से जाने के लिए चेन्नई से वेल्लोर होकर या फिर चेन्नई से विलुपुरम होकर जाया जा सकता है। आप विलुपुरम या वेल्लोर में भी ठहर सकते हैं और तिरुवनमलाई मंदिर के दर्शन करके वापस लौट सकते हैं।

इस मंदिर की एक खासियत है साथ ही यहां की एक कथा भी है जो सबसे ज्यादा प्रचलित है। आपको बता दे, एक बार ब्रह्माजी ने हंस का रूप धारण किया और भगवान के शीर्ष को देखने के लिए उड़ान भरी। उसे देखने में असमर्थ रहने पर ब्रह्माजी ने एक केवड़े के पुष्प से, जो शिवजी के मुकुट से नीचे गिरा था, शिखर के बारे में पूछा। फूल ने कहा कि वह तो चालीस हजार साल से गिरा पड़ा है। ब्रह्माजी को लगा कि वह शीर्ष तक नहीं पहुंच पाएंगे, तब उन्होंने फूल को यह झूठी गवाही देने के लिए राजी कर लिया कि ब्रह्माजी ने शिवजी का शीर्ष देखा था। शिवजी इस धोखे पर गुस्सा हो गए और ब्रह्माजी को श्राप दिया कि उनका कोई मंदिर धरती पर नहीं बनेगा। वहीं केवड़े के फूल को श्राप दिया कि वह कभी भी शिव पूजा में इस्तेमाल नहीं होगा। जहां भगवान शिव ने ब्रह्माजी को श्राप दिया था, वह स्थल तिरुवनमलाई है।