धर्मव्रत / त्यौहार

शनि जयंती पर आज 972 साल बाद रहेंगे ये चार ग्रह एक साथ, जानें क्या होंगे इसके फायदे और नुकसान

शनि को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। शनि को प्रसन्न करके व्यक्ति जीवन के कष्टों को कम कर सकता है। ऐसा माना जाता है कि जब भी कभी ग्रहों में किसी तरह का कोई बदलाव होता है तो इसका सीधा असर हमारी राशि पर पड़ता है। जिस वजह से कुंडली पर शनि बैठ जातें हैं और ऐसे में व्यक्ति के जीवन में दुख भी आ सकते हैं तो खुशियां भी आ सकती हैं।

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आपको बता दे, 22 मई 2020 को ज्येष्ठ महीने की अमास्या होने से इस दिन शनि जयंती मनाई जाएगी। शनि के साथ बृहस्पति मकर राशि में रहेगा। ग्रहों की ऐसी स्थिति 21 मई 1048 को बनी थी। अब ऐसा संयोग अगले पांच सौ सालों तक नहीं बनेगा। आपको बता दे, 972 साल बाद शनि 4 ग्रहों में एक साथ रहने वाले है। जिससे देश में कुछ अच्छे प्रभाव पड़ेंगे। वहीं कुछ बुरे असर भी पड़ेगा। तो चलिए जानते है इसके बारे में-

972 साल बाद बना ऐसा संयोग-

इस बार शनि जयंती पर चार ग्रह एक ही राशि में होंगे और शनि के साथ बृहस्पति मकर राशि में रहेगा। वहीं, विश्व में भारत की प्रसिद्धि बढ़ेगी। विश्व के दूसरे देश भारत को सहयोग करेंगे। देश में न्याय और धर्म बढ़ेगा। बड़े प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी निभा रही महिलाओं का प्रभाव बढ़ेगा। मजदूर वर्ग और निचले स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए अच्छा समय शुरू होगा। खेती को बढ़ावा मिलेगा। अनाज और खाने की अन्य चीजों का उत्पादन बढ़ेगा। वहीं आपको बता दे, शनि जयंती पर वृष राशि में सूर्य, चंद्र, बुध और शुक्र एक साथ रहेंगे। इन 4 ग्रहों के कारण देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी।शनि जयंती पर वृष राशि में सूर्य, चंद्र, बुध और शुक्र एक साथ रहेंगे। इन 4 ग्रहों के कारण देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। दरअसल, इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 21 मई 1048 को बनी थी। अब ऐसा संयोग अगले 500 सालों तक भी नहीं बनेगा।

इतने महीनों तक एक राशि में रहेंगे शनि –

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9 ग्रहों में शनि 7वां ग्रह है। ये बहुत धीरे-धीरे चलने वाला ग्रह है। ये एक राशि में करीब 30 महीने यानी ढाई साल तक रहता है। मकर व कुम्भ राशि वाले लोगों पर शनि पूरा प्रभाव रहता है। क्योंकि ये शनि की ही राशियां है। शनि को क्रूर और न्याय का ग्रह माना जाता है।

अच्छा फल प्राप्त करने के लिए करें ये उपाय –

शनि जयंती पर्व पर भगवान शनिदेव को तिल का तेल चढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही काला कपड़ा भी चढ़ाएं। साथ ही शमी पेड़ के पत्ते और अपराजिता के नीले फूल पूजा में शामिल करने चाहिए। तिल, उड़द, काला कंबल, बादाम, लोहा आदि का संध्या के समय दान करना चाहिए।

यह खबर हिंदू पौराणिक कथाओं और लोक कथाओं से प्रेरित है। हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति, संप्रदाय या धर्म की भावनाओं को आहत करना नहीं है।