बिहार के पूर्वी चंपारण में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में 17 जनवरी को दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग की विधिवत स्थापना की जाएगी। इस अवसर पर पांच पवित्र नदियों के जल से महाभिषेक किया जाएगा। स्थापना समारोह के दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी होगी,जिससे यह धार्मिक आयोजन ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप ग्रहण करेगा।
शिवलिंग का अभिषेक हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर और सोनपुर से लाए गए पवित्र जल से किया जाएगा। 17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि है,जिसे धार्मिक मान्यताओं में शिवलिंग की उत्पत्ति का दिन माना जाता है। इस तिथि का महत्व शिवरात्रि के समान बताया गया है।
महावीर स्थान न्यास समिति के अनुसार,फिलहाल शिवलिंग की केवल स्थापना की जाएगी। मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद ही प्राण प्रतिष्ठा कराई जाएगी। स्थापना के दिन भव्य यज्ञ का आयोजन होगा,जिसमें चारों वेदों के विद्वान शामिल होंगे। सुबह 8.30 बजे से पूजा आरंभ होगी और दोपहर में शिवलिंग को स्थापित किया जाएगा। पूजा के उपरांत प्रसाद और भोजन वितरण भी होगा।
10 वर्षों में तैयार हुआ विराट शिवलिंग
यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव में एक ही काले ग्रेनाइट शिलाखंड से तराशा गया है। इसका निर्माण कार्य बीते 10 वर्षों से चल रहा था। 33 फीट ऊंचे और 210 मीट्रिक टन वजनी इस शिवलिंग पर 1008 सहस्त्रलिंगम उकेरे गए हैं। 21 नवंबर को इसे 96 चक्के वाले विशेष वाहन से बिहार के लिए रवाना किया गया था।
45 दिनों में तय की 2500 किलोमीटर की दूरी
तमिलनाडु से चला यह शिवलिंग आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश होते हुए करीब 45 दिनों में बिहार पहुंचा। गोपालगंज के रास्ते परिसर में प्रवेश के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने इसका भव्य स्वागत किया। जहां-जहां वाहन रुका, वहां दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती रही। विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से जारी है और इसे धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।









