हिंदू धर्म में पितृ दोष को एक गंभीर ज्योतिषीय दोष माना गया है। जब पूर्वज किसी कारणवश संतुष्ट नहीं होते या उनकी आत्मा को शांति नहीं मिल पाती, तब यह दोष उत्पन्न होता है। पितृ दोष के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, रुकावटें और अशांति बनी रहती हैं।
आइए जानते हैं पितृ दोष के मुख्य कारणों को विस्तार से..
पूर्वजों की अधूरी इच्छाएं
अगर हमारे पितरों की इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं और हम उन्हें पूरा नहीं कर पाते, तो उनकी आत्मा असंतुष्ट रहती है। यह स्थिति अक्सर अकाल मृत्यु या अधूरे कार्यों के कारण बनती है। यही अधूरी कामनाएं पितृ दोष का कारण बन सकती हैं।
श्राद्ध कर्म की उपेक्षा
श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण या पिंडदान करना बेहद जरूरी माना गया है। जब कोई परिवार इन धार्मिक कर्मों की अनदेखी करता है, तो पूर्वजों की आत्मा को शांति नहीं मिलती। इस असंतोष के कारण पितृ दोष उत्पन्न होता है और वंशजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
पूर्वजों का अपमान
माता-पिता या बड़ों का अनादर करना, उनकी इच्छाओं की अनदेखी करना या जीवित रहते हुए उनका अपमान करना पितृ दोष को जन्म देता है। यह केवल पारिवारिक कलह ही नहीं लाता, बल्कि जीवन में लगातार समस्याएं खड़ी कर सकता है।
विधिवत अंतिम संस्कार का अभाव
यदि किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार धार्मिक विधियों से नहीं किया जाता, तो उसकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती। इस कारण परिवार के सदस्यों को पितृ दोष का सामना करना पड़ सकता है।
असहाय की हत्या
निर्दोष और असहाय प्राणियों की हत्या करना या उन्हें कष्ट पहुंचाना भी गंभीर पाप माना गया है। ऐसे कर्म पितृ दोष का कारण बनते हैं और व्यक्ति के जीवन में विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न कर सकते हैं।
पवित्र वृक्षों को काटना
हिंदू धर्म में पीपल, बरगद और नीम जैसे पेड़ों को अत्यंत पूजनीय माना गया है। इन वृक्षों को बिना कारण काटना या नुकसान पहुंचाना पितृ दोष का कारण बन सकता है।
अंतिम संस्कार में भूल
यदि अंतिम संस्कार में विधि-विधान का पालन न किया जाए या कोई गलती हो जाए, तो आत्मा को मोक्ष नहीं मिल पाता। यह भी पितृ दोष का एक बड़ा कारण माना जाता है।
जानवरों की हत्या
बिना वजह जानवरों को मारना या उनका अपमान करना भी पाप माना गया है। इस प्रकार का व्यवहार पितृ दोष को आमंत्रित करता है और जीवन में अशांति का कारण बन सकता है।
छल-कपट और धोखाधड़ी
जो लोग अपने मन में छल-कपट रखते हैं, दूसरों को धोखा देते हैं या प्रॉपर्टी विवाद में गलत कदम उठाते हैं, उन पर भी पितृ दोष का प्रभाव पड़ सकता है।
धार्मिक नियमों की अनदेखी
धार्मिक नियमों का पालन न करना, व्रत-त्योहारों की उपेक्षा करना, अमावस्या जैसे पवित्र दिनों में मांस-मदिरा का सेवन करना पितरों की नाराजगी का कारण बन सकता है। इससे भी पितृ दोष उत्पन्न होता है।
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