पुष्यमित्र… आपके लिए

आप में वे सारे गुण मौजूद हैं जो एक नेक इंसान में होते हैं लेकिन अब उन्हीं गुणों की मधुरता से शहर के प्रत्येक नागरिक के सुख दुख आपको बाँटना है। आपने अपनेपन, विश्वास एवं समर्पित भाव से सभी का दिल जिता है लेकिन अब आपको निरन्तर संपर्क और संवाद क़ायम करना है।

अन्ना दुराई। देश ही नहीं दुनिया की निगाहों में हमारा इन्दौर शहर है। अपनी उपलब्धियों से शहर ने खासी पहचान बनाई है। अपना इंदौर आज भी अपार संभावनाओं का शहर है। पूर्ण विकसित शहर की परिकल्पना को अब आकार लेना है। स्वच्छता के साथ अब हर क्षेत्र में अपने शहर को अव्वल देखना है। ऐसे में पुष्यमित्र आपका चुना जाना जनता की ओर से एक ख़ास संकेत और अपेक्षाओं को इंगित करता है। पुष्यमित्र, अब आप शहर के प्रथम नागरिक हैं। जन जन की भावनाएँ आपसे जुड़ी हुई है। उनकी निगाहें आपकी ओर है। अपनी खूबियों से जो आपने नाम कमाया है अब उसे साझा करने का समय आ गया है। आप में वे सारे गुण मौजूद हैं जो एक नेक इंसान में होते हैं लेकिन अब उन्हीं गुणों की मधुरता से शहर के प्रत्येक नागरिक के सुख दुख आपको बाँटना है। आपने अपनेपन, विश्वास एवं समर्पित भाव से सभी का दिल जिता है लेकिन अब आपको निरन्तर संपर्क और संवाद क़ायम करना है।

आप में क़ाबलियत है, कुछ करने की ललक है, लेकिन अब अपने कार्यों से व्यावहारिक धरातल पर अपना श्रेष्ठतम देने को तत्पर होना है। आप सुशिक्षित एवं समझदार हैं लेकिन अब आपको अपने याद रखने लायक़ कार्यों से सभी की उम्मीदों पर खरा उतरना है। आप मेहनती एवं परिश्रमी हैं लेकिन अब अपनी लगनशीलता से कर्मपथ पर अग्रसर होकर इन्दौर को विशिष्ट पहचान दिलाना है।

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पुष्यमित्र, नेता तो आप बन गए हैं, लेकिन अब जन शब्द आगे जुड़े इसके लिए आपको जतन करना चाहिए। कामना है, आप वादों से नहीं इरादों से, घोषणाओं से नहीं परिणामों से, विकारों से नहीं विचारों से, द्वंदता से नहीं दृढ़ता से, नारों से नहीं आचारों से इंदौर शहर के हितों के लिए कृतसंकल्पित रहेंगे….