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दस मिनट में सिरदर्द गायब

Posted on: 07 Jan 2019 18:24 by mangleshwar singh
दस मिनट में सिरदर्द गायब

डॉ. सी.एम. पाटनी

किसी भी उम्र के युवक-युवती, महिला या पुरुष को किसी भी मौसम में पूर्ण, अद्र्ध या आंशिक, हल्का-सा तेज टपकदार सिरदर्द हो सकता है। सिरदर्द का प्रभाव मरीज की बर्दाश्त क्षमता के अनुसार तो प्रभावित होता है। किसी न किसी हद तक सभी पीडि़त व्यक्तियों या महिलाओं की शारीरिक तथा मानसिक क्षमता तथा शक्ति पर भी असर डालता है। संक्षेप में मुख्य कारणों का अध्ययन करें तो इसके लिए मौसम, खानपान, रहन-सहन, श्रम-परिश्रम की अधिकता या कमी, अपच, कब्ज, गैस, कमजोरी (एनिमिया) रक्तचाप, आवश्यक दैनिक क्रियाओं, मल-मूत्र विसर्जन, नींद, भूख-प्यास की खराबी तथा प्रतिकूल आहार-विहार को प्रभावी माना जा सकता है।

 

वैसे तो लगभग सभी चिकित्सा पद्धतियों में सिरदर्द निवारण हेतु चिकित्सा व्यवस्था का प्रावधान होता है। किंतु चिकित्सा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष कारणों का ही निवारण हो पाता है। अप्रत्यक्ष कारणों की ओर अक्सर ध्यान नहीं जा पाता। प्रत्यक्ष कारणों में भी कुछ कारण चिकित्सा क्षेत्र के प्रभाव की परिधि के बाहर रह सकते हैं। इस क्रम में सबसे मुख्य बात यह अवश्य है कि चाहे सिरदर्द के समस्त कारणों का निवारण हो पाये या नहीं, लेकिन उनके कारण मरीज के मन तथा मस्तिष्क पर पडऩे वाला दबाव किसी भी व्यवस्था, दवा आदि की सहायता से हटाया अथवा भुलाया जा सके, तो मरीज कुछ ही समय में सिरदर्द से राहत पा सकता है।

 

यही कारण है कि कुछ चिकित्सा विधियों में रोगी को दवा खिलाकर नींद में सुलाने या कोई दर्दनाशक दवा खिलाकर राहत पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। चुंबक और ऐक्यूप्रेशर विधि से चिकित्सा के आविष्कार के परिणामस्वरूप सिरदर्द निवारण हेतु किसी नींद लाने या पेन किलर दवा की जरूरत नहीं पड़ती। किसी भी कारण से हुए सिरदर्द को शुद्ध प्राकृतिक तरीके से निम्न कार्य प्रणाली द्वारा अधिक से अधिक १० या १५ मिनट में ठीक किया जा सकता है।

 

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इस कार्य हेतु मरीज के पास किसी परिचायक का होना सुविधाजनक रहता है।

 

मरीज को अगर संभव हो सके तो आल्थी-पाल्थी मारकर अद्र्ध पद्मासन मुद्रा में आराम से सीधी कमर रखते हुए बैठा लें तथा परिचायक को मरीज की पीठ के समीप जमीन से मरीज एक फुट ऊंची किसी कुर्सी, चारपाई या स्टूल पर इस तरह से पैर लटका कर बैठना चाहिए कि वह मरीज के लिए सिर के पिछले हिस्से गर्दन के दोनों कंधों के बीच, तथा आसपास तथा पीठ के गर्दन के पास वाले एक चौथाई भाग (सरवाइकल रीजन) रीढ़ की हड्डी के दायें-बायें हिस्से आदि को अपने दोनों हाथों की अंगुलियों तथा अंगूठे के आखरी पोर और हथेली की सहायता से मरीज को सहने लायक जोर से दबाव डालते हुए मालिश करें। यह दबाव दायें से बायें, बायें से दायें, ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर तथा कभी-कभी गोल-गोल रूप में डालना होता है।

 

इसमें किसी तरह के तेल, घी या अन्य पदार्थ की जरूरत नहीं होती। इसी तरह गर्दन के पीछे के भाग को आगे का गले वाला हिस्सा छोडक़र ब्रेक लगाने की भांति दबाना तथा छोडऩा चाहिए। सामान्यत: १० मिनट की यह ऐक्यूप्रेशर विधि वाली मालिश पर्याप्त होती है।

 

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कास्ट या फैराइट किस्म के निम्न प्रकार मरीज की उम्र को ध्यान में रखते हुए कम से कम छह या अधिकतम आठ चुंबक लेकर सिरदर्द से पीडि़त मरीज के सिर के नीचे की ओर गर्दन के पास कंधों के बीच में स्पर्श कराते हुए इस तरह से रखें कि उनमें से एक उत्तरी धु्रव दूसरे के दक्षिणी धु्रव से लगा रहे।

 

इस क्रम में एक के पास दूसरे-तीसरे सभी को साथ-साथ लगाकर एक चेन की भांति रखकर उन पर मरीज को गर्दन वाला हिस्सा स्पर्श कराते हुए मरीज को सुलाकर आवश्यक वस्त्रादि उढ़ा दें। थोड़ी देर में दर्द खुद-ब-खुद मिटने लगेगा तथा मरीज आराम की नींद लेगा।

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