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उनाकोटी प्रकृति की गोद में बसा अनूठा स्थल जहां 99999 मूर्तियां विराजमान है

उनाकोटी मे,देवी-देवताओं की एक लाख मुर्तियों मे,एक कम,अर्थात कोटी(लाख) मे एक कम,इसीलिए इस इस स्थान का नाम उनाकोटी है। बाय रोड सिलचर (असम) से 160 किलोमीटर और अगरतला(त्रिपुरा) से 126 किलोमीटर दुर त्रिपुरा राज्य मे स्थित है,यह स्थान। निकट का रेलवे स्टेशन धर्मनगर जो की 20 किलोमीटर दुर है यहां से।धर्मनगर के लिए, सिलचर और अगरतला,दोनो ही स्थान से ट्रेन उपलब्ध है।

पहाड़ों और पत्थरों मे,उकेरी गई इन कलाकृतियों को,सैकड़ों वर्षों से,धुल,धुआं,धुप, पानी और उपेक्षा का सामना करना पड़ा है। जिससे रॉक कला में गिरावट और नुकसान हुआ है।  जब से केन्द्र और राज्य मे,राजनीतिक परिवर्तन हुआ है, उसके बाद से,एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) द्वारा विरासत स्थल के रूप में अपनाए जाने के बाद, स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है।हालांकि पर्याप्त खुदाई सहित बहुत सारे काम किए जाने बाकी हैं। भारत सरकार ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के लिए,यूनेस्को से संपर्क किया है। इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए,केंद्र सरकार ने,हाल ही में 12 करोड़ रुपये दिए हैं।

वर्तमान मे यहां सैकड़ों कलाकृतियां,अपने वैभवशाली कला और इतिहास की गवाही,प्रस्तुत कर रही है। किवदंती है,की शिव के साथ सारे देवता काशी जा रहे थे,यहां रात्रि विश्राम के लिए रूके तो,सुबह सभी देवता सोएं ही रह गये और भोलेनाथ काशी के लिए प्रस्थान कर चुके थे। नवी-दसवीं सदी की बनी यह मूर्तियां,बंगाली मूर्ति कला का अद्भुत उदाहरण है।यह हिन्दू धर्म की,वैभवशाली विरासत है।