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जानिए क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति पर पतंग महोत्सव

Posted on: 06 Jan 2019 00:17 by Amit Shukla
जानिए क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति पर पतंग महोत्सव

नए साल का पहला त्योहार मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी को मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में इस पर्व का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बताया जाता है. माना जाता है कि इस दिन सूर्य का उत्तरायण होता है और वे इस दिन मकर राशि में प्रवेश करते हैं. सूर्य देव को प्रकृति का कारक माना जाता है, इसलिए इस दिन सूर्य देव की उपासना की जाती है. मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का बहुत महत्व बताया जाता है. इस दिन कई जगहों पर पतंग उड़ाई जाती है, खिचड़ी का भोग लगाया जाता है और गुड़-तिल व गजक का प्रसाद भी बांटा जाता है.

मकर संक्रांति से दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं. जनवरी महीने में नई फसल का आगमन होता है और किसान फसल की कटाई के बाद इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं. हालांकि भारत में इस पर्व को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है और इससे जुड़ी कई अलग-अलग परंपराएं भी प्रचलित हैं. मकर संक्रांति को हम पतंग महोत्सव या इंटरनैशनल काइट फेस्टिवल के नाम से भी जाना जाता है.

आखिर क्यों कहते है मकर संक्रांति को इंटरनैशनल काइट फेस्टिवल

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भारत में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। उन त्योहारों से जुड़ी अनेक मान्यताएं व परंपराएं भी प्रचलित है। उन परंपराओं के पीछे अनेक कारण भी हैं जो कहीं न कहीं हमारे लिए उपयोगी भी है। मकर संक्रांति भी हमारे देश के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार संपूर्ण भारत में अनेक नाम व तरीकों से मनाया जाता है। अनेक स्थानों पर इस त्योहार पर पतंग उड़ाने की परंपरा प्रचलित है। लोग दिन भर अपनी छतों पर पतंग उड़ाकर इस उत्सव का मजा लेते हैं। अनेक स्थानों पर विशेष रूप से पतंग उड़ाने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। मकर संक्रांति पर्व पर पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं अपितु मनोवैज्ञानिक पक्ष है।

पौष मास की सर्दी के कारण हमारा शरीर कई बीमारियों से ग्रसित हो जाता है जिसका हमें पता ही नहीं चलता। इस मौसम में त्वचा भी रुखी हो जाती है। जब सूर्य उत्तरायण होता है तब इसकी किरणें हमारे शरीर के लिए औषधि का काम करती है। पतंग उड़ाते समय हमारा शरीर सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आ जाता है जिससे अनेक शारीरिक रोग स्वत: ही नष्ट हो जाते हैं।

देश के इन राज्यों में मनाया जायगा इंटरनैशनल काइट फेस्टिवल

गुजरात में पतंग महोत्सव बड़े धूम धाम से बनाया जाता है इस दिन आसमान में आप को रंग-बिरंगी पतंगे तो कभी आपके पास से निकलती कार्टून नुमा पतंग। जिसे देखकर आपके चेहरों पर बेवजह मुस्‍कुराहट आ जाती है। यह दिलकश नजारा आपको गुजरात के अहमदाबाद  इंटरनैशनल काइट फेस्टिवल में देखने को मिलेगा। जहां इंट्री करते ही आपको हर तरफ बिल्‍कुल फेस्टिवल जैसा माहौल देखने को मिलेगा, तो अगर आप भी गुजरात के आस-पास रहते हैं और किसी खास उत्‍सव का हिस्‍सा बनना चाहते हैं तो देर किस बात की, पहुंच जाइए इस बेहद खूबसूरत फेस्टिवल में।

गुजरात टूरिज्‍म डिपार्टमेंट की ओर से उत्‍तरायन यानी मकर संक्रांति के मौके पर हर साल अहमदाबाद में इंटरनैशनल काइट फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। इस बार का आयोजन 6 से 14 जनवरी तक किया जाएगा। बता दें कि यह इस उत्‍सव का 30वां साल होगा। इस महोत्सव का मुख्‍य इवेंट अहमदाबाद स्थि‍त साबरमती रिवरफ्रंट पर किया जाता है। उत्‍तरायन के मौके पर आयोजित होने वाले अहमदाबाद के इस कार्यक्रम का स्‍थानीय लोगों के साथ ही पर्यटक भी बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं क्‍यूंकि इस उत्‍सव के दौरान केवल मस्‍ती ही नहीं बल्कि गुजराती लजीज पकवानों का भी स्‍वाद चखने को मिलता है।

गुजरात में लोग सुबह जल्‍दी उठकर इस उत्‍सव में शामिल होने की तैयारी करते हैं। इसके लिए खास पकवान लड्डू, उंधयू और सूरती जामुन बनाए जाते हैं। इसके अलावा लोग छतों पर परिवारों, दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों के साथ पतंगबाजी का लुत्‍फ उठाते हैं। बता दें कि इस उत्‍सव का आयोजन अहमदाबाद के अलावा दूसरे अलग-अलग हिस्‍सों सूरत, वड़ोदरा, राजकोट और नडियाद में किया जाता है। एक हफ्ते तक चलने वाले इस रंग-बिरंगे फेस्टिवल में भारत के अलग-अलग हिस्‍सों के अलावा यूके, कनाडा, ब्राजील, इंडोनेशिया, ऑस्‍ट्रेलिया, यूएसए, मलेशिया, सिंगापोर, फ्रांस, चाइना और अन्‍य देशों के लोग शामिल होते हैं।

मकर संक्रांति’ 2019 पर राजस्थान और गुजरात में पतंग उड़ाने की पंरपरा है। जिसकी वजह से गुजरात में ‘पतंग महोत्सव’ भी मनाया जाता है। इसके अलावा घरों में सूर्य पूजा करने के लिए घेवर, फैनी, तिल के लड्डू बनाएं जाते हैं। तो वहीं, महिलाओं को सुहाग का सामान देना शुभ होता है। मध्यप्रदेश में भी आप कही जगह मकर संक्रांति के मोके पर पतंग फेस्टिवल का आनद देखने को मिलेगा खास कर बाबा महाकाल की पवित्र नगरी उज्जैन के दशहरा मैदान पर शुक्रवार सुबह नया उत्साह, नई उमंग और आनंद के साथ पतंग महोत्सव का आयोजन किया जायगा। 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व पर सुबह 7 बजे से पतंग महोत्सव में न सिर्फ पतंगबाजी हुई, बल्कि परंपरागत व्यंजनों का जायका और बग्घी पर सैरसपाटे का लुत्फ भी शहरवासियों ने उठाया।

मकर संक्रांति से जुड़ी परंपराएं

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मकर संक्रांति के पर्व को देशभर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है और इससे जुड़ी परंपराएं भी एक दूसरे से भिन्न हैं. ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के मौके पर मीठे पकवानों को खाने और खिलाने से रिश्तों में आई कड़वाहट दूर होती है. कई स्थानों पर इस दिन तिल और गुड़ से बनी मिठाई बांटी जाती है. मान्यता है कि मकर संक्रांति के मौके पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर पहुंचते हैं, इसलिए इस दिन गुड़ और तिल बांटने की परंपरा है. गुजरात और मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में मकर संक्रांति के पर्व के दौरान पतंग उड़ाने की परंपरा है, इसलिए इस मौके पर यहां पतंग उड़ाए जाते हैं. पतंग बाजी के दौरान पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से गुलजार हो जाता है.

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