उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। पहले किसान जहां कर्ज और संकट से जूझते थे, अब वे कर्जमुक्त होकर सम्मानपूर्वक खेती कर रहे हैं।
सरकार के शुरुआती फैसलों में किसानों की ऋणमाफी को प्राथमिकता दी गई, जिससे 86 लाख से अधिक किसानों को सीधे राहत मिली। इसके चलते राज्य की कृषि विकास दर 2016-17 में 8.5% से बढ़कर 2025-26 तक अनुमानित 18% हो गई है। यह उत्तर प्रदेश को देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले कृषि राज्यों में शामिल करता है।
किसानों के लिए योजनाओं का विस्तार
पिछले नौ वर्षों में किसानों के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 353.14 लाख किसानों को 5,660 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 86,128 सोलर पंप लगाए गए। 437.68 लाख किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए गए और 2025-26 तक 70.36 लाख नए केसीसी जारी हुए।
एमएसपी पर खरीद प्रणाली को पारदर्शी बनाया गया है। 2025-26 में 10.53 लाख किसानों से 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई और 48 घंटे के भीतर लगभग 15,000 करोड़ रुपये डीबीटी के जरिए किसानों को दिए गए। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई और किसानों को समय पर भुगतान मिला।
कृषि क्षेत्र में राज्य की मजबूती
उत्तर प्रदेश देश की कुल कृषि योग्य भूमि का 11% हिस्सा रखता है, लेकिन खाद्यान्न उत्पादन में उसका योगदान 21% है। राज्य की 76% भूमि कृषि कार्य में उपयोग होती है। 2016-17 में कृषि व संबद्ध क्षेत्र का जीएसडीपी 2.96 लाख करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर 6.95 लाख करोड़ रुपये हो गया।
‘लैब टू लैंड’ अभियान के तहत वैज्ञानिकों ने 14,170 गांवों में 23.3 लाख किसानों तक पहुंचकर उन्हें आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी दी। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत किसानों को यूपी सहकारी ग्राम विकास बैंक से अब 6% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध है, जो पहले 11.5% थी।
प्रत्यक्ष लाभ, तकनीक और उत्पादन में बढ़ोतरी
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत यूपी के किसानों को अब तक 99,003.69 करोड़ रुपये की 22 किस्तें दी गई हैं, जो देशभर के कुल लाभार्थियों का 23% हैं। बीज, उर्वरक व कृषि यंत्रों पर भी राज्य सरकार ने फोकस किया है। पिछले नौ वर्षों में 556.09 लाख क्विंटल बीज, 840.97 लाख मीट्रिक टन उर्वरक व 2.31 लाख से अधिक कृषि यंत्र वितरित किए गए। 8,405 कस्टम हायरिंग सेंटर और 7,351 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित हुए।
आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में सीड पार्क, बाराबंकी में टिश्यू कल्चर लैब और पीलीभीत में बासमती बीज उत्पादन एवं प्रशिक्षण केंद्र तैयार किए जा रहे हैं।
दुग्ध, गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों में अग्रणी
दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में पहले नंबर पर है। 2024-25 में राज्य का दुग्ध उत्पादन 388.15 लाख मीट्रिक टन रहा, जो राष्ट्रीय उत्पादन का 16.2% है। नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत 2030 तक दुग्ध उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
गन्ना किसानों को 2017 के बाद 3.16 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। गन्ने का समर्थन मूल्य 300 से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया। एथेनॉल उत्पादन 42 करोड़ लीटर से 188 करोड़ लीटर तक पहुँचा। राज्य का गन्ना उत्पादन में 57.26% योगदान है।
उत्तर प्रदेश गन्ना, चीनी, खाद्यान्न, दूध, आलू, मटर, मेंथा, शहद और एथेनॉल जैसे कृषि उत्पादों में देश में शीर्ष स्थान पर है। फल और सब्जी उत्पादन में भी राज्य 400 लाख टन के साथ अग्रणी है।
सरकार की इन पहलों से प्रदेश के किसानों की आय, उत्पादन और समृद्धि लगातार बढ़ रही है।












