यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा हुई रद्द, योगी सरकार ने जारी किया आदेश

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By Abhishek SinghPublished On: January 8, 2026
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उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को राज्य सरकार ने रद्द कर दिया है। जांच में सामने आया है कि आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष प्रोफेसर कीर्ति पांडेय के गोपनीय सहायक महबूब अली द्वारा प्रश्नपत्र लीक किए गए थे। एसटीएफ की जांच में परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने के ठोस प्रमाण मिले हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा निरस्त कर दोबारा आयोजन कराने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने यह भर्ती परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित की थी। इसके बाद 20 अप्रैल को यूपी एसटीएफ ने गोंडा स्थित लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल, उसके भाई विनय कुमार तथा अयोध्या निवासी महबूब अली को गिरफ्तार किया। महबूब अली उस समय आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था।

एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने परीक्षा के प्रश्नपत्र लाखों रुपये में बेचे थे। इस मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने एसटीएफ को विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान महबूब अली से बरामद डाटा का विश्लेषण किया गया और मोबाइल नंबरों से जुड़ी जानकारी एकत्र की गई। जब इस डाटा का मिलान आयोग के रिकॉर्ड से कराया गया तो यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा की पारदर्शिता और शुचिता से समझौता किया गया है। इसी आधार पर प्रदेश सरकार ने परीक्षा निरस्त करने का फैसला लिया।

जांच में परीक्षा की शुचिता भंग होने की पुष्टि

जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों और उनसे जुड़े अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का डाटा विश्लेषण किया गया, साथ ही मुखबिर तंत्र से मिली जानकारियों के आधार पर कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के नाम और नंबर भी सामने आए। इस संबंध में आयोग को पत्र भेजकर संदिग्ध अभ्यर्थियों का डाटा उपलब्ध कराने को कहा गया। प्राप्त जानकारी के मिलान के बाद यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित परीक्षा की निष्पक्षता और शुचिता प्रभावित हुई है।

उपलब्ध तथ्यों और जांच निष्कर्षों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित परीक्षा को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को आदेशित किया गया है कि उक्त परीक्षा का पुनः आयोजन जल्द से जल्द, पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कराया जाए।