अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का सीधा असर अब मध्य प्रदेश के कपास और टेक्सटाइल उद्योग पर दिखाई देने लगा है। वर्तमान स्थिति में प्रदेश से अमेरिका को करीब 3546 करोड़ डॉलर मूल्य का टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात होता है, जो कुल निर्यात का लगभग 26 प्रतिशत है। लेकिन 50 फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद यह निर्यात घटकर केवल 1.50 हजार करोड़ डॉलर तक सीमित रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसका सीधा नुकसान कपास और वस्त्र उद्योग को उठाना पड़ेगा। हालांकि, उद्योग जगत के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार छूट योजनाओं और नए देशों में बाजार तलाशने के जरिए इस नुकसान की भरपाई करने का प्रयास करेगी। फिलहाल प्रदेश में लगभग 50 टेक्सटाइल मिलें सक्रिय हैं, जो इस चुनौती से जूझ रही हैं।
अमेरिकी बाजार में भारतीय कपड़े की पहचान
मध्य प्रदेश एसोसिएशन ऑफ कॉटन प्रोसेसर्स एंड ट्रेडर्स के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल का कहना है कि अमेरिका में उत्पादन क्षमता सीमित है, लेकिन तकनीक उन्नत है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कपड़ों की गुणवत्ता और डिजाइन को अमेरिकी उपभोक्ताओं ने चीन और अन्य देशों की तुलना में अधिक पसंद किया है। भारतीय कपड़ों ने अपनी क्वालिटी और आकर्षक डिजाइनों के दम पर वहां विशेष पहचान बनाई है। यही कारण है कि अब व्यापारी अमेरिकी टैरिफ के बावजूद वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहे हैं।
नए बाजारों की खोज – ऑस्ट्रेलिया, जापान और ब्रिटेन पर नजर
व्यापारियों का मानना है कि ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होने से संभावनाएं खुली हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों में भी भारतीय कपास और वस्त्र निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है। सरकार फिलहाल टेक्सटाइल पर 11 प्रतिशत ड्यूटी फ्री आयात की सुविधा उपलब्ध करा रही है। इस योजना के चलते निर्यातकों को उम्मीद है कि वे अमेरिकी बाजार के नुकसान की भरपाई दूसरे देशों में करके कर पाएंगे।
कपास उत्पादन में मध्य प्रदेश की अहम भूमिका
भारत कपास उत्पादन में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इस साल देश में करीब 3 करोड़ 15 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ है। मध्य प्रदेश में ही पिछले वर्ष 18 लाख गांठ उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष करीब 19 लाख गांठ होने का अनुमान है। सिर्फ खरगोन मंडी से ही 2 लाख 80 हजार गांठ की आवक होती है और जिले का कुल उत्पादन लगभग 5 लाख गांठ तक पहुंच जाता है। कपास उत्पादन में खरगोन पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है।
उद्योगों की चुनौतियां और नए समाधान
टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव एम.सी. रावत ने बताया कि 50 फीसदी टैरिफ की वजह से अमेरिका को निर्यात में बड़ी गिरावट आएगी। ऐसे में हमें अपने निर्यात को अन्य देशों की ओर मोड़ना पड़ेगा। नए देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन करने और वहां बाजार बनाने की प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लगेगा। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक उद्योगों को इंतजार करना होगा।
भारत सरकार का फैसला और उसका असर
अमेरिका के टैरिफ के बीच भारत सरकार ने कपास (HS 5201) पर आयात शुल्क को 31 दिसंबर 2025 तक शून्य करने का फैसला लिया है। पहले यह छूट केवल 30 सितंबर तक थी। वित्त मंत्रालय का यह निर्णय वैश्विक व्यापार दबाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। हालांकि, इससे घरेलू किसानों पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि विदेशी कपास अब सस्ता होकर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा।
किसानों के सामने नई चिंता
मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र – खरगोन, खंडवा, बड़वानी, धार, बुरहानपुर और रतलाम कपास उत्पादन का मुख्य केंद्र हैं। वहीं इंदौर, देवास, खरगोन और उज्जैन जैसे जिले टेक्सटाइल उद्योग के लिए जाने जाते हैं। सरकार द्वारा आयात शुल्क खत्म करने से विदेशी कपास आसानी से और कम दाम पर भारत में उपलब्ध होगा, जिससे स्थानीय किसानों और मिलों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। जहां उपभोक्ताओं को सस्ती कीमत का फायदा होगा, वहीं किसानों और उद्योगपतियों के सामने आय की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।