एमपी के इस शहर में बनेगी करोड़ों की वीआईपी रोड, नेशनल हाईवे से सीधा जुड़ाव देगा विकास को रफ्तार

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By Raj RathorePublished On: February 22, 2026

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में वीआईपी रोड निर्माण का काम स्थानीय बहस का बड़ा विषय बन गया है। शहर के इस प्रोजेक्ट को प्रशासनिक प्राथमिकता मिलने पर ग्रामीण इलाकों के प्रतिनिधि और नागरिक सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कई गांवों में सड़क, मरम्मत और संपर्क मार्ग की जरूरत लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन बजट का फोकस शहर के सीमित हिस्से पर दिख रहा है।

विवाद का केंद्र यह है कि विकास योजनाओं में प्राथमिकता किस आधार पर तय की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह तर्क सामने आ रहा है कि जिला मुख्यालय और शहरी मार्गों का उन्नयन जरूरी है, लेकिन इसके साथ गांवों की बुनियादी सड़क जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि वीआईपी रोड प्रोजेक्ट को लेकर अब बजट के उपयोग और योजना संतुलन पर सवाल बढ़ गए हैं।

ग्रामीण सड़कों की स्थिति बहस का मुख्य आधार

क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि कई ग्रामीण मार्ग बरसात में प्रभावित हो जाते हैं और आवाजाही बाधित रहती है। कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी सड़कों की स्थिति से सीधे जुड़ी है। ऐसे में शहर के एक हाई-विजिबिलिटी प्रोजेक्ट पर खर्च को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है। स्थानीय पक्ष यह भी कह रहा है कि जिला स्तर की योजना बैठक में गांवों की प्राथमिकता को अधिक स्पष्ट तरीके से शामिल किया जाना चाहिए।

इस मुद्दे में राजनीतिक स्वर भी जुड़े हैं। विपक्षी पक्ष और जनप्रतिनिधि बजट वितरण में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर शहरी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, तो ग्रामीण परियोजनाओं की समय-सीमा और फंडिंग स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।

प्रशासन की प्राथमिकता और जवाबदेही पर फोकस

प्रशासनिक पक्ष से आमतौर पर यह तर्क दिया जाता है कि शहर के मुख्य मार्गों का निर्माण ट्रैफिक प्रबंधन, संस्थागत पहुंच और जिला ढांचे को मजबूत करने के लिए जरूरी होता है। साथ ही, अलग-अलग मदों में मिलने वाले फंड का उपयोग निर्धारित शर्तों के अनुसार किया जाता है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यही मांग उठ रही है कि उपलब्ध संसाधनों का वितरण क्षेत्रीय जरूरत के अनुपात में दिखना चाहिए।

विकास योजनाओं में असली चुनौती संतुलन की होती है। एक तरफ शहरी ढांचे को उन्नत करना जरूरी माना जाता है, दूसरी तरफ ग्रामीण संपर्क मार्गों के बिना जिला अर्थव्यवस्था और सेवा ढांचा प्रभावित होता है। राजगढ़ का मौजूदा विवाद इसी संतुलन की कमी को सामने ला रहा है।

नीतिगत संकेत: योजना बनाम प्राथमिकता

यह मामला सिर्फ एक सड़क परियोजना तक सीमित नहीं है। यह संकेत देता है कि जिला योजना, तकनीकी स्वीकृति और बजट आवंटन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना होगा। यदि ग्रामीण और शहरी परियोजनाओं की स्थिति, लागत और प्रगति नियमित रूप से सार्वजनिक की जाए, तो ऐसे विवाद कम हो सकते हैं।

पुराने संदर्भ का अलग लिंक उपलब्ध नहीं होने के कारण इस मुद्दे का ऐतिहासिक तुलनात्मक विवरण सीमित है, लेकिन वर्तमान बहस से स्पष्ट है कि स्थानीय जनता अब परियोजना-आधारित घोषणा की बजाय संतुलित और मापनीय विकास परिणाम देखना चाहती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजगढ़ में वीआईपी रोड के साथ ग्रामीण सड़कों के लिए क्या ठोस कार्ययोजना और समयबद्ध क्रियान्वयन सामने आता है।