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रात ढाई बजे प्रधानमंत्री के फ़ोन ने कलेक्टर जोगी को बना दिया नेता

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की ज़िंदगी में क्रिकेट से भी ज्यादा अनिश्चितता रही है। शुक्रवार दोपहर तीन बजे उन्होंने रायपुर में अंतिम सांस ली। वे करीब दो हफ्ते से अस्पताल में भर्ती थे। जोगी हर बार वे योद्धा की तरह उभरे और एक नई राह पर खड़े दिखे। अजीत जोगी ने जो भी राह पकड़ी उसके शीर्ष पर जाकर ही रुके। पढाई में गोल्ड मेडलिस्ट। जोगी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं।

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वे एक ऐसे व्यक्ति रहे जो आईपीएस और आईएएस दोनों के लिए चुने गए। दो साल तक वे आईपीएस और फिर उसके बाद आईएएस बने। कलेक्टर के तौर पर भी उनका रिकॉर्ड बेहद कारगर रहा। इंदौर और रायपुर कलेक्टर रहते उन्होंने अलग ही छाप छोड़ी। राजनीति में आये तो सीधे राज्यसभा सांसद और उसके बाद मध्यप्रदेश से टूटकर बने छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री। खुद प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इंदौर कलेक्टर अजीत जोगी को बनाया था नेता।

1985, शहर इंदौर। रात का वक्त, रेसिडेंसी एरिया स्थित कलेक्टर का बंगला। कलेक्टर साहब सो रहे हैं। अचानक फोन बजता है। दौड़कर एक कर्मचारी उठाता है। बताता है – कलेक्टर साहब सो गए हैं।

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फोन की दूसरी तरफ से अधिकार भरे स्वर में आदेश आता है – कलेक्टर साहब को उठाइये और बात करवाइये। साहब जगाए जाते हैं। फोन पर आते हैं। दूसरी तरफ से आवाज आती है। ये फोन था प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पीए वी जॉर्ज का। और फोन उठाने वाले थे अजीत जोगी। नेता नहीं, कलेक्टर अजीत जोगी।

उसी रात 2:30 घंटे बाद जब दिग्विजय सिंह कलेक्टर आवास पहुंचे। राजीव गांधी का संदेश अजीत जोगी को दिया। कुछ ही घंटों में इंदौर कलेक्टर नेता जोगी बन चुके थे। कांग्रेस जॉइन कर ली। कुछ ही दिन बाद उनको कांग्रेस की ऑल इंडिया कमिटी फॉर वेलफेयर ऑफ़ शेड्यूल्ड कास्ट एंड ट्राइब्स के मेंबर बना दिया गया। कुछ ही महीनों में राज्यसभा भेज दिए गए।

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अजीत जोगी कांग्रेस में राजीव की पसंद से आए थे। ये वो वक्त था जब राजीव ओल्ड गार्ड्स को ठिकाने लगा नई टीम बना रहे थे। मध्य्रदेश से दिग्विजय सिंह उनकी सूची में शीर्ष पर थे। छ्त्तीसगढ़ जैसे आदिवासी इलाके के लिहाज से जरूरत लगी एक नए लड़के की। एक ऐसे युवा की जो विद्याचरण, श्यामाचरण शुक्ला ब्रदर्स को चुनौती दे सके। इस तरह राजीव एंड कंपनी की नजर गई जोगी पर। एक तेज तर्रार आईएएस।

जो बोलता भी बहुत था। काम भी करता था। कांग्रेस में आने के बाद अजीत की गांधी परिवार से नज़दीकियां बढ़ती रहीं। अजीत जोगी सीधी और शहडोल में लंबे समय तक कलेक्टर रहे। सीधी में पड़ता है चुरहट, जहां के अर्जुन सिंह का उस वक़्त मध्यप्रदेश में सिक्का चलता था। अजीत जोगी ने हवा का रुख भांप अर्जुनसिंह को अपना गॉडफादर बना लिया। बड़ा हाथ सिर पर आया तो अजीत खुद को पिछड़ी और अतिपिछड़ी जातियों का नेता मानने लगे। इतने बड़े कि जो दिग्विजय सिंह उन्हें राजनीति में लाए थे, उनके ही खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार पंकज मुकाती है।