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इंदौर कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक का अजीत जोगी का सफरनामा

अर्जुन राठौर

इसमें कोई दो मत नहीं है कि अजीत जोगी एक करिश्माई व्यक्ति थे इंदौर कलेक्टर से लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बनने तक की उनकी यात्रा बेहद दिलचस्प रही उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक सफल प्रशासनिक अधिकारी किस तरह से सफल राजनेता भी बन सकता है । उन्हें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह का वरदहस्त प्राप्त था और अर्जुन सिंह ने अजीत जोगी जो कि उस समय इंदौर के कलेक्टर थे उनका इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निपटाने के लिए बेहद खूबी के साथ किया चाहे मामला यज्ञदत्त शर्मा का हो या फिर सुरेश सेठ का इन दोनों को ही अजीत जोगी के माध्यम से अपदस्थ करने में अर्जुन सिंह को भारी सफलता मिली ।

लता मंगेशकर के कार्यक्रम को लेकर जब सुरेश सेठ ने अर्जुन सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया तब अजीत जोगी ने सुरेश सेठ का मुकाबला किया और अंततः अजीत जोगी के दम पर इंदौर में लता मंगेशकर का कार्यक्रम न सफलतापूर्वक हुआ बल्कि अर्जुन सिंह ने इस कार्यक्रम में यह घोषणा भी कर दी कि प्रतिवर्ष यह कार्यक्रम इंदौर में ही हुआ करेगा ।

असल में मध्य प्रदेश की राजनीति में यह एक ऐसा दौर था जिसमें अर्जुन सिंह निरंतर शक्तिशाली हो रहे थे और उनके विरोधियों को धूल चटाई जा रही थी जब विधानसभा अध्यक्ष के रूप में यज्ञदत्त शर्मा बेहद शक्तिशाली होने लगे तब भी उनके खिलाफ मोर्चा अजीत जोगी ने ही संभाला यज्ञ दत्त शर्मा के खिलाफ उस समय की चर्चित पत्रिका रविवार में उनके भूमि प्रेम को लेकर एक बड़ी कवर स्टोरी प्रकाशित हुई जिसे लिखा था पत्रकार बसंत पोद्दार ने इस स्टोरी के प्रकाशन के साथ ही यज्ञदत्त शर्मा के खिलाफ अभियान शुरू हो गया । उस समय विधानसभा अध्यक्ष होने के नाते और उस गुरूर में यज्ञदत्त शर्मा एक बहुत बड़ी राजनीतिक भूल कर गए उन्होंने रविवार के संपादक सुरेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ विधानसभा में अवमानना का मामला लाने की कोशिश की इसके बाद सुरेंद्र प्रताप सिंह के समर्थन में दिल्ली के दिग्गज पत्रकार इकट्ठा हुए और सभी पहुंच गए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास और उन्होंने बताया कि यज्ञदत्त शर्मा किस तरह से बड़े अखबारों के संपादकों को प्रताड़ित करने का कार्य कर रहे हैं । उसी समय रविवार में प्रकाशित खबर भी इंदिरा जी को बताई गई बस उसके बाद तो यज्ञदत्त शर्मा के राजनीतिक पतन की शुरुआत हो गई और फिर वे दोबारा कभी भी मेन स्ट्रीम में नहीं आ सके। ऐसा कहा जाता है कि इस स्टोरी की सामग्री जुटाने में कहीं ना कहीं अजीत जोगी भी सहयोगी बने थे बसंत पोतदार के ।

सुरेश सेठ जो कि इंदिरा जी के बेहद नजदीकी माने जाते थे उन्हें भी अर्जुन सिंह ने अपने राजनैतिक दांव पेच से पराजित कर दिया सुरेश सेठ बेहद शक्तिशाली और दिग्गज नेता थे लेकिन उनसे भी कई भूलें हुई । सुरेश सेठ सीधे-सीधे अर्जुन सिंह को चुनौती देने लगे थे स्वायत्त शासन मंत्री होने के बावजूद अर्जुन सिंह के खिलाफ बोलने से नहीं चूकते थे और अंततः उन्हें इसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ी उनका मंत्री पद चला गया अर्जुन सिंह के लिए सुरेश सेठ को अपदस्थ करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि इसलिए भी थी कि वे इंदिरा जी के खास माने जाते थे इसके बाद तो अर्जुन सिंह का रुतबा लगातार बढ़ता चला गया ।

अजीत जोगी को अर्जुन सिंह ने इन दोनों दिग्गज राजनीतिज्ञों को निपटाने के पुरस्कार स्वरूप ही कांग्रेस की राजनीति में प्रवेश दिलाया और उसके बाद जब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का विभाजन हुआ तो अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बन गए मध्य प्रदेश की राजनीति में किसी भी कलेक्टर के राजनीति में प्रवेश के बाद मुख्यमंत्री बनने का यह पहला मामला था हालांकि छत्तीसगढ़ में 5 साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद अजीत जोगी चुनाव हार गए और उसके बाद तो उनके पतन की कहानी शुरू हो गई ।इसमें कोई दो मत नहीं है कि अजीत जोगी ने पहली बार यह साबित किया कि किसी भी कलेक्टर को जब मुख्यमंत्री का सरंक्षण मिलता है तो वह क्या क्या कर सकता है चाहे उस समय दूध के भाव का मामला हो या फिर लता अवार्ड का मामला कलेक्टर अजीत जोगी ने अपने सख्त तेवर दिखाए और उन्होंने सुरेश सेठ जैसे दबंग और दिग्गज नेता को भी हाशिए पर धकेल दिया । इंदौर के उद्योगपति कैलाश सहारा अर्जुन सिंह के खास माने जाते थे और उसी दौरान चर्बी कांड का मामला जब इंदौर के दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुआ तो इसकी गूंज विधानसभा तक में सुनाई दी लेकिन अजीत जोगी ने यहां पर भी अपनी भूमिका निभाते हुए कैलाश सहारा को पूरी तरह से बचा लिया । सुरेश सेठ इस बात से बेहद नाराज रहते थे कि इंदौर में जनप्रतिनिधियों को कुचला जा रहा है और अजीत जोगी जो कि कलेक्टर है उन्हें अघोषित जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

जिस समय अजीत जोगी इंदौर के कलेक्टर थे उसी दौरान उनके साले रत्नेश सालोमन अर्जुन सिंह मंत्रिमंडल में संसदीय सचिव बने हुए थे और अर्जुन सिंह भी उस दौरान कांग्रेस में अपने प्रबल विरोधी कृष्णपाल सिंह हजारीलाल रघुवंशी सुरेश सेठ श्रीनिवास तिवारी यज्ञदत्त शर्मा सहित अनेक दिग्गजों से अपने रणनीतिक कौशल से निपट रहे थे इंदौर में यज्ञ दत्त शर्मा और सुरेश सेठ यह दो ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अर्जुन सिंह की सत्ता को सीधे-सीधे चुनौती दी और मजे की बात यह है कि इन दोनों को ही हाशिए पर धकेल दिया गया इसके साथ ही इंदौर में जुझारू राजनीति का अंत हो गया अजीत जोगी के लिए कांग्रेस में प्रवेश बहुत बड़ा पुरस्कार था क्योंकि कहीं न कहीं उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा हिलोरे ले रही थी और इसके बाद उनके राजनीतिक उत्थान की कहानी अपने उत्कर्ष पर पहुंची जिसमें वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बन गए।

जिस समय अजीत जोगी इंदौर के कलेक्टर थे उस दौरान इंदिरा जी शहीद हुई और दंगे शुरू हो गए तब भी अजीत जोगी ने अपनी प्रशासनिक कुशलता का निर्वाह करते हुए दंगों को रोकने में कामयाबी हासिल की वैसे कलेक्टर थे जो कई बार इंदौर की सड़कों पर घोड़े पर सवार होकर दिखाई देते थे उनके इस तेवर को इंदौर की जनता बेहद पसंद करती थी।

अजीत जोगी सोनिया गांधी के खास माने जाते थे जब सोनिया गांधी इंदौर आई थी तब अजीत जोगी की बेटी ने उसी दिन आत्महत्या कर ली थी तब सोनिया जी निजी रूप से शोक व्यक्त करने के लिए उनके बंगले पर गई थी हालांकि बाद में कांग्रेस से मतभेद होने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में अपनी अलग पार्टी बना ली लेकिन फिर उनकी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वे लगातार हाशिए पर चले गए अगर वे अलग पार्टी नहीं बनाते तो संभावना थी कि वे फिर से कांग्रेस के मुख्यमंत्री बन सकते थे ।