मध्यप्रदेश में बच्चों के लिए 1 अप्रैल का दिन खास उत्साह लेकर आया, जब उन्हें स्कूल जाने के लिए न केवल नि:शुल्क साइकिलें मिलीं, बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद उन्हें प्रेरित किया।
बुधवार को मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ‘स्कूल चलें हम राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम-2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को निःशुल्क साइकिलों का वितरण किया और उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में सीएम डॉ. मोहन यादव ने बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उनके साथ सेल्फी भी ली। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया, जिसके बाद बच्चों पर पुष्प वर्षा की।
दोबारा स्कूल जाने का निर्णय लेने वाले विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री ने स्वयं किताबें भेंट कीं और उनके माता-पिता का अभिनंदन किया, जिससे बच्चों और अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
“आज का दिन अद्भुत है। एक साथ हजारों बच्चे स्कूल में प्रवेश कर रहे हैं। जिनका स्कूल दूर है, उन्हें साइकिल मिल रही है। आज समय बदल रहा है। कांग्रेस के शासनकाल में यह संभव नहीं था कि साइकिल मिल जाए। आप भाग्यशाली हैं कि आपको किताबें मिल रही हैं, साइकिल मिल रही है, यूनिफॉर्म के लिए राशि मिल रही है।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है और हमारी सरकार भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। उन्होंने जोर दिया कि वर्तमान सरकार और शिक्षा विभाग ने अभिभावकों का दिल जीता है, जिसके परिणामस्वरूप आज ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
नामांकन में रिकॉर्ड वृद्धि, सरकारी स्कूलों पर बढ़ा भरोसा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गर्व से बताया कि राज्य में नामांकन में 19.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि शासकीय विद्यालयों में बच्चों की प्रगति दर 32.4 प्रतिशत बढ़ी है, जो सरकारी स्कूलों में बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने सांदीपनि स्कूलों और पीएम श्री स्कूलों का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि इनमें बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिसके चलते अब बच्चे निजी स्कूलों को छोड़कर इन सरकारी विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं में किताबों का वितरण किया जा रहा है।
कल्याणकारी योजनाएं और भविष्य की रूपरेखा
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज हर बच्चा स्कूल जाने के लिए उत्साहित है। अनुसूचित जनजाति के लिए 95 हजार क्षमता वाले 1 हजार 913 छात्रावासों का संचालन हो रहा है, जिनमें 20 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने 1वीं, 6वीं और 9वीं कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया को सरल बनाया है।
प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरण के लिए इस बार बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत लगभग एक लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 55 लाख विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म दी जा चुकी है और 76 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। मुख्यमंत्री ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें हर क्षेत्र में नाम रोशन करने का आह्वान किया।
“आज का दिन स्कूली शिक्षा विभाग के लिए दीपावली का दिन है। आज प्रदेश के बच्चे स्कूलों में प्रवेश कर रहे हैं। हमारा इनरॉलमेंट बढ़ रहा है। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि आज हमने एक करोड़ बच्चों को इनरॉल किया है। हमारा पूरा विभाग ड्रॉप आउट को रोकने का प्रयास कर रहा है। हम किताबों को निशुल्क देने में सफल हुए हैं।” — उदय प्रताप सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने इस दिन को स्कूली शिक्षा विभाग के लिए दीपावली जैसा बताया। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य ड्रॉपआउट दर को शून्य बनाए रखना है और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कार्य करना है। उन्होंने ब्लॉक स्तर पर बुक फेयर लगाने की योजना का भी जिक्र किया, जहां शासकीय और निजी स्कूलों के बच्चों को पाठ्यपुस्तक निगम की सस्ती किताबों का लाभ मिल सके।
जनजातीय कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि शासकीय स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, साइकिलें, स्कूटी और लैपटॉप जैसी सुविधाएं वितरित की जा रही हैं, जो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।











