Indore में पानी की आपूर्ति सुधारने की तैयारी, 3 हजार किलोमीटर पाइपलाइन और 6 हजार बोरिंग का सर्वे हुआ शुरू

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By Abhishek SinghPublished On: January 9, 2026

इंदौर नगर निगम ने शहर की जलप्रदाय व्यवस्था सुधारने के लिए एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। इस योजना के तहत शहर की 3,000 किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन का सर्वे और 6,000 से अधिक सरकारी बोरिंग की जियो-टैगिंग का काम शुरू कर दिया गया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि पूरे इंदौर में 3,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन फैली हुई है, जिसका सर्वे किया जा रहा है। वहीं, शहर में मौजूद 6,000 बोरिंग का पानी भी पेयजल के रूप में उपयोग होता है। प्रत्येक बोरिंग पर दो तरह के काम एक साथ किए जा रहे हैं: एक ओर बोरिंग की जियो-टैगिंग की जा रही है, वहीं दूसरी ओर हर बोरिंग में क्लोरीन डालकर पानी को शुद्ध किया जा रहा है।

शहर की सभी सरकारी बोरिंग पर जियो-टैगिंग अनिवार्य

नगर निगम प्रशासन अब शहर की सभी 6,600 सरकारी बोरिंग की जियो-टैगिंग को अनिवार्य कर रहा है। इसके साथ ही, पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बोरिंग में क्लोरीन डालने का कार्य भी युद्धस्तर पर किया जा रहा है। भागीरथपुरा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निजी बोरिंगों का भी क्लोरीनकरण कराया गया है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि नगर निगम के प्रत्येक जोनल कार्यालय में नर्मदा परियोजना और पेयजल कार्यों के लिए अलग-अलग टीमें कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से सर्वे का काम प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में, जहां दूषित जल के कारण समस्या उत्पन्न हुई थी, वहां पूरी लाइन की जांच भी पहले से जारी है। इस संपूर्ण सर्वे के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरे शहर में पानी की लाइनों में कहीं भी लीकेज न रह जाए।

भागीरथपुरा घटना के बाद नई गाइडलाइन जारी

भागीरथपुरा में हाल ही में हुई दुखद घटना के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी। इसी के तहत इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि शहर की संपूर्ण पानी की पाइपलाइन का निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि किसी भी स्थान पर लीकेज पाए जाने पर उसे तुरंत सुधार दिया जा सके।

छोटी लीकेज से भी दूषित जल का खतरा

निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि इंदौर में कई जगह पानी और ड्रेनेज की पाइपलाइनें बहुत करीब होकर गुजरती हैं। किसी भी छोटी सी लीकेज से पानी दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है। इस सर्वे का प्रमुख लक्ष्य ऐसे जोखिमों को पूरी तरह खत्म करना है। इस काम को नगर के प्रत्येक जोनल कार्यालय की टीमें सक्रिय रूप से अंजाम दे रही हैं।