हाईकोर्ट ने डेली कॉलेज चुनाव पर नहीं लगाई रोक, सभी याचिकाएं की खारिज, 21 मई को होगा मतदान

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By Raj RathorePublished On: May 15, 2026

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने डेली कॉलेज सोसायटी के संविधान संशोधन, चुनाव प्रक्रिया और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से जुड़े मामलों को चुनौती देने वाली सभी प्रमुख याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद साफ किया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने और बैलेट पेपर जारी होने के बाद अदालत इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं करेगी।

मामले में जय सिंह झाबुआ, विक्रम खंडेलवाल और संदीप पारेख की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें डेली कॉलेज सोसायटी द्वारा किए गए संविधान संशोधनों, चुनाव कार्यक्रम और ओल्ड डेलियन्स एसोसिएशन के प्रतिनिधित्व को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने, संशोधित संविधान को निरस्त करने और पुराने नियमों के तहत चुनाव कराने की मांग की थी।

चुनाव प्रक्रिया में दखल से किया इनकार

डेली कॉलेज सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार आसूदानी और अधिवक्ता रक्षित आसूदानी ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश चुनाव अधिकारी के रूप में नियुक्त हैं। बैलेट पेपर जारी किए जा चुके हैं और 21 मई 2026 को मतदान की तारीख तय हो चुकी है।

Daly College Election

सोसायटी की ओर से यह भी कहा गया कि डेली कॉलेज एक निजी अनुदानरहित संस्था है, ऐसे में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है। साथ ही याचिकाकर्ताओं के पास मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 40 के तहत वैकल्पिक कानूनी उपाय भी उपलब्ध हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले “N.P. Ponnuswami Vs Returning Officer” का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतों को हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

कोर्ट ने माना कि बैलेट पेपर भेजे जा चुके हैं और चुनाव कार्यक्रम लागू हो चुका है, इसलिए इस चरण में हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

डेली कॉलेज सोसायटी को मिली बड़ी राहत

हाईकोर्ट के इस फैसले को डेली कॉलेज सोसायटी के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से संविधान संशोधन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद और कानूनी चुनौतियां लगातार सामने आ रही थीं।

अब सभी याचिकाएं खारिज होने के बाद 21 मई को प्रस्तावित चुनाव प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।