भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को 63 वर्षीय बद्री प्रसाद की इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें 17 जनवरी को लगातार उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वे पहले से टीबी की बीमारी से भी जूझ रहे थे। इस घटना के बाद इलाके में गंदे पानी से हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर 26 तक पहुंच गया है।
क्षेत्र में गंदे पानी से जुड़ी मौतों का क्रम अभी भी जारी है। वर्तमान में अरविंदो अस्पताल में 10 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से एक की हालत गंभीर होने के कारण उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अस्पताल में भर्ती अधिकांश मरीज पहले से ही अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं।
अब तक 26 मौतें, हाई कोर्ट में 15 की पुष्टि
इलाके में पेयजल आपूर्ति के लिए प्रतिदिन 50 से अधिक टैंकर लगाए जा रहे हैं। जहां पाइपलाइन का काम चल रहा है, वहां टैंकरों को गलियों के पास तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि लोगों को पानी लेने के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े। वहीं इस पूरे मामले में अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि शुरुआत में प्रशासन ने पहले 4, फिर 6 मौतों की पुष्टि की थी। बाद में हाई कोर्ट में सौंपी गई रिपोर्ट में 21 मौतों में से 15 को स्वीकार किया गया। इस मामले में अगली स्टेटस रिपोर्ट 27 जनवरी को अदालत में प्रस्तुत की जानी है।
70 प्रतिशत क्षेत्र में पाइपलाइन सुधार का कार्य जारी
भागीरथपुरा में दूषित जल आपूर्ति प्रकरण के बाद अब इलाके के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति बहाल की गई है, जिसकी लगातार गुणवत्ता जांच भी की जा रही है। इसके बावजूद लोगों का भरोसा अभी पूरी तरह नहीं लौट पाया है और अधिकांश परिवार आरओ या टैंकर के पानी पर ही निर्भर हैं। शेष करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र में पाइपलाइन सुधार का कार्य जारी है, जिसे इस महीने के अंत तक पूरा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।










